उदयपुर/ फलासिया. udaipur rain पंचायत समिति क्षेत्र में शनिवार देर रात हुई बेमौसम की बरसात ने किसानों की कमर तोड़ दी है। पहले अतिवृष्टि में 40 फीसदी से अधिक फसलों के खराब को लेकर रो रहे किसानों के लिए अब ये बरसात कहर ढा रही है। बरसात के बीच खेतों में खड़ी और कटी हुई सोयाबीन की फसल पर संकट आ खड़ा हुआ है। क्षेत्र से जुड़े सरकारी आंकड़ों पर गौर करें तो फलासिया क्षेत्र में सबसे ज्यादा करीब 5 हजार हैक्टेयर खेतीहर जमीन पर सोयाबीन की खेती हुई है। वहीं दूसरे क्रम में करीब 3 हजार 5 सौ हैक्टेयर में मक्का, दो सौ हैक्टेयर में उड़द की खेती हुई है। ऐसे में बेमौसम की बरसात से इन फसलों के खराबे की आशंका बन गई है। खास तौर पर पूरी तरह खेती पर आश्रित किसानों के लिए यह बरसात चिंता की लकीरें लेकर आई है। कृषि विभाग की मानें तो क्षेत्र में 1500 से 1800 क्विंटल सोयाबीन की पैदावार प्रति हैक्टेयर होती है। इस बार यह आकड़ा घटकर 900 से 1100 क्विंटल प्रति हैक्टेयर पर आ गया है।
चोरी भी चुनौती
पहाड़ी इलाका होने के कारण किसानों के पास खेतीहर भूमि का रकबा कम है। इससे क्षेत्र में बड़े किसानों की संख्या कम है। ऐसे में फसल प्रभावित इलाकों में चोरियों की घटनाएं बढ़ जाती है। विषम परिस्थितियों से जूझते कुछ लोग उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए राजकीय संस्थानों के साथ सूने मकानों को भी चोरी के लिए निशाना बनाते हैं। आंगनबाड़ी, स्कूलों और घरों में चोरी के माध्यम से जमा अन्न को लोग आपस में भी बांटते हैं।
सोयाबीन का नुकसान
बेमौसम बरसात से सोयाबीन का नुकसान हुआ है। आगामी सात दिन तक धूप रही तो ज्यादा नुकसान नहीं होगा। हालांकि, मौसम को देखते हुए ऐसा नहीं लग रहा है। पिछले वर्ष की अपेक्षा इस बार पैदावार कम दर्ज की गई है। शिवदयाल मीणा, सहायक कृषि अधिकारी, पानरवा40 फीसदी फसल खराबाअतिवृष्टि के बाद क्षेत्रीय किसानों की गिरदावरी की गई है। इसमें 40 फीसदी फसलों का खराबा हुआ है। इसकी रिपोर्ट सरकार को भेजी गई है। आपदा प्रबंधन मद से अगर, राशि स्वीकृत होती है तो किसानों में वितरित की जाएगी।
कान्तिलाल मेघवाल, पटवारी, फलासिया
खेतों में भरा पानी, परेशान किसान
गींगला पसं. मेवल क्षेत्र में हुई तेज बारिश और सोमवार को रिमझिम के बीच एक बार फिर खेतों में पानी भरने की समस्या गहरा गई है। नमी के बीच चारा और कड़ब पर संकट मंडरा रहा है। खेतों में हंकाई व बुवाई कार्य में देरी की आशंकाएं जन्म ले रही है। खड़ी फसलों के जलमग्न होने से खराबे की आशंका बन रही है। समस्या को लेकर किसानों के चेहरों पर चिंता की लकीरें जन्म ले रही हैं।





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