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अलवर में युवाओं के कंधों पर सवार होगी शहर की सरकार

अलवर. शहर की सरकार इस बार भी युवाओं के कंधों पर ही सवार रहेगी। इसका कारण है कि अलवर नगर परिषद चुनाव के लिए नामांकन भरने वाले प्रत्याशियों में आधे से ज्यादा की उम्र 21 से 45 वर्ष के बीच है। वहीं 61 साल से ज्यादा उम्र के नामांकन भरने वाले प्रत्याशियों की संख्या मात्र 50 है।

नगर परिषद चुनाव के लिए नामांकन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। नाम वापसी के बाद ज्यादातर प्रत्याशी चुनाव प्रचार में जुट गए हैं। इस बार सबकी निगाह चुनाव मैदान में उतरे युवाओं पर टिकी है। चुनाव में भाग्य आजमा रहे इन युवाओं में ज्यादातर चेहरे नए हैं। ये नए चेहरे ही इस बार चुनाव का खास आकर्षण हैं।

सबसे ज्यादा प्रत्याशी 45 साल तक

अलवर नगर परिषद में 65 वार्डों के चुनाव के लिए 503 प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किए। खास बात यह कि इनमें 21 से 45 वर्ष आयु वर्ग के नामांकन करने वाले प्रत्याशियों की संख्या 299 हैं। यानि नगर परिषद चुनाव लडऩे की इच्छुक प्रत्याशियों की कुल संख्या के आधे ज्यादा प्रत्याशी युवा हैं। इनमें भी नामांकन करने वाले दो प्रत्याशियों की उम्र महज 21 साल है, जबकि चुनाव आयोग की ओर से चुनाव लडऩे की न्यूनतम उम्र 21 साल निर्धारित की है। यानि इस बार अलवर शहर की सरकार की कमान युवाओं के हाथ रहने की उम्मीद है। शहर के तीन वार्ड ऐसे हैं जिनमें नामांकन करने वाले सभी प्रत्याशियों की उम्र 21 से 45 वर्ष के बीच है।

45 से 60 वर्ष आयु के प्रत्याशी 154 ही

नगर परिषद अलवर के लिए नामांकन करने वाले 45 से 60 वर्ष आयु वर्ग के प्रत्याशियों की संख्या 154 है। यानि 21 से 45 वर्ष आयु वर्ग के जितने प्रत्याशियों ने नामांकन किए, उनसे करीब आधी संख्या में 45 से 60 वर्ष आयु वर्ग के प्रत्याशियों ने नामांकन किया। नगर परिषद अलवर में चुनाव लडऩे वाले प्रत्याशियों को लेकर खास बात यह कि उम्र बढऩे के साथ ही उनकी संख्या भी कम रह गई।

61 साल से ज्यादा उम्र के 10 फीसदी ही प्रत्याशी

अलवर शहर की सरकार बनाने के लिए चुनाव लडऩे वाले 61 साल से ज्यादा उम्र के प्रत्याशियों की संख्या कुछ उम्मीदवार का करीब 10 प्रतिशत ही है। अलवर नगर परिषद चुनाव के लिए 503 प्रत्याशियों ने नामांकन दाखिल किए, इनमें 61 साल से ज्यादा उम्र के प्रत्याशियों की संख्या मात्र 50 तक सीमित रही।

शहर की सरकार बनाने में रहेगी मुख्य भूमिका

अलवर शहर की सरकार बनाने में युवा वर्ग की मुख्य भूमिका रहने की उम्मीद है। इसका कारण है कि चुनाव लड़ रहे प्रत्याशियों में आधे से ज्यादा की उम्र 21 साल से 45 साल के बीच है। राज्य सरकार ने इस बार निकाय चुनाव में चेयरमैन चुनने का अधिकार पार्षदों को दिया है। यानि शहर की सरकार का मुखिया के चयन में युवा पार्षदों की भूमिका मुख्य रहने की संभावना है।

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