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राजस्थान में धरातल पर उतरेगा स्टेट हाइवे प्राधिकरण

जयपुर. राज्य सरकार स्टेट हाइवे पर निजी वाहनों से टोल वसूली शुरू करने के बाद टोल माफिया पर शिकंजा कसने, टोल की दरें तर्कसंगत करने की तैयारी कर रही है। सरकार स्टेट हाइवे एक्ट 2014 के तहत स्टेट हाइवे प्राधिकरण को कागजों से बाहर निकालकर शीघ्र अमलीजामा पहनाएगी। प्राधिकरण के कार्यशील होने के बाद स्टेट हाइवे के रखरखाव, बेहतर कनेक्टिविटी, टोल वसूली, टोल दरों में नियमानुसार वृद्धि जैसे काम बेहतर तरीके से होंगे।
राज्य में 15 हजार किलोमीटर लम्बे स्टेट हाइवे हैं। ये सार्वजनिक निर्माण विभाग, राजस्थान स्टेट रोड डवलपमेंट कॉर्पोरेशन के अधीन हैं। दोनों ज्यादातर समय सड़कों के निर्माण में व्यस्त रहते हैं। स्टेट हाइवे के रखरखाव, टोल संबधी शिकायतों के निस्तारण पर इनका ध्यान कम ही है। जबकि राज्य सरकार स्टेट हाइवे का तंत्र मजबूत करने के लिए वल्र्ड बैंक से लोन लेती है। पिछले माह भी सरकार और सार्वजनिक निर्माण विभाग ने वल्र्ड बैंक से लोन एग्रीमेंट किया है। मुख्य सचिव के स्तर पर हाल ही हुई बैठक में वल्र्ड बैंक के प्रतिनिधियों ने लोन की शर्तों के तहत स्टेट हाइवे प्राधिकरण को शीघ्र क्रियाशील करने को कहा था। 
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खड़ा हो गया था असमंजस
राज्य सरकार ने हाल ही स्टेट हाइवे पर निजी वाहनों से टोल वसूली की छूट समाप्त की तो असमंजस खड़ा हो गया था कि 18 महीने बाद अब टोल संचालक किस दर से टोल वसूलेंगे? फिलहाल पुरानी दरों से ही टोल लिया जा रहा है। प्राधिकरण क्रियाशील होता तो असमंजस नहीं होता।
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प्राधिकरण के ये फायदे
- स्टेट हाइवे की सड़कों का समय पर रखरखाव हो सकेगा
- टोल संचालक एक्ट के तहत ही दरें बदल सकेेंगे
- टोल चुकाने वाले वाहन चालकों की शिकायतें सुनी जा सकेंगी
- सरकार का राजस्व बढ़ेगा
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एक्ट के तहत प्राधिकरण पहले ही बन गया था, इसे क्रियाशील करना है। हालांकि इस प्रक्रिया में समय लगेगा।
- वीके सिंह, अतिरिक्त मुख्य अभियंता (पीपीपी सेल), सार्वजनिक निर्माण विभाग

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