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मतदान की घड़ी आई फिर भी बागियों पर नहीं हुई कार्रवाई

अलवर. नगर परिषद अलवर चुनाव में भाजपा प्रत्याशियों के खिलाफ निर्दलीय व अन्य संगठनों के माध्यम से बागी होकर चुनाव लड़ रहे कार्यकर्ताओं के खिलाफ अभी संगठन की ओर से कार्रवाई का इंतजार है, जबकि मतदान शनिवार को होना है। पार्टी के अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव लडऩे वालों में भाजपा के एक मंडल अध्यक्ष, कुछ मंडल व मोर्चा पदाधिकारी भी शामिल है।

भाजपा के अधिकृत प्रत्याशियों के खिलाफ नगर परिषद में एक दर्जन से ज्यादा पार्टी के कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों व पार्षद या इनके परिजन चुनाव मैदान डटे हैं। निकाय चुनाव की नामांकन प्रक्रिया व नाम वापसी के बाद भी भाजपा के ये कार्यकर्ता बागी होकर लड़ रहे है। चुनाव के लिए प्रचार का अभियान भी पूरा हो गया तथा मतदान की घड़ी भी आ गई, लेकिन पार्टी के बागी प्रत्याशी व पार्टी कार्यकर्ताओं के बागी होकर लड़ रहे परिजन अभी चुनाव मैदान में खड़े हैं। इस कारण शहर के कई वार्डों में भाजपा प्रत्याशियों के चुनावी समीकरण भी गड़बड़ा गए हैं।

प्रत्याशी कर चुके हैं कार्रवाई की मांग

भाजपा के कई प्रत्याशी अपने वार्ड में बागी होकर चुनाव में उतरे पार्टी कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों व पार्षदों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर चुके हैं ,लेकिन अभी तक पार्टी के प्रदेश नेतृत्व की ओर से कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है।

पदाधिकारियों समेत एक दर्जन से ज्यादा बागी मैदान में

भाजपा के बागी के रूप में एक मंडल अध्यक्ष राजेश तिवाड़ी वार्ड 60 से अपने ही दल के अधिकृत प्रत्याशी के खिलाफ चुनाव मैदान में डटे हैं। वहीं पार्टी के एक मोर्चा के पदाधिकारी राकेश सैनी वार्ड 25 से, पार्टी के पार्षद महेन्द्र वर्मा वार्ड 26 से, अशोक छीपी की पत्नी आशा छीपी आशा छीपी, पार्षद रमाकांत यादव वार्ड 21 से, भानू माथुर वार्ड 31, राहुल गर्ग वार्ड 60 से, बाबूलाल शर्मा पहलवान सहित करीब एक दर्जन से ज्यादा पार्टी कार्यकर्ता, पदाधिकारी व पार्षद या उनके परिजन भाजपा प्रत्याशियों के खिलाफ चुनाव मैदान में डटे हैं।

अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने वालों के कटे टिकट

नगर परिषद अलवर के भाजपा बोर्ड के खिलाफ पिछले दिनों अविश्वास प्रस्ताव पेश किया गया था। प्रस्ताव पर भाजपा के ही कई पार्षदों ने हस्ताक्षर किए थे। इस बार निकाय चुनाव में पार्टी ने अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने वाले ज्यादातर भाजपा पार्षदों को टिकट नहीं दिए, लेकिन दो-तीन पार्षद अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने के बाद भी टिकट हथियाने में कामयाब रहे। हालांकि अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करने वाले जिन पार्षदों को टिकट मिले, उनकी पैरवी कुछ पूर्व जनप्रतिनिधियों व पार्टी के अन्य पदाधिकारियों की ओर से करने की चर्चा है।

बागियों के खिलाफ कार्रवाई विचाराधीन

निकाय चुनाव में पार्टी प्रत्याशियों के खिलाफ बागी होकर स्वयं या अपने किसी परिजन को चुनाव मैदान में उतारने वाले पार्टी पदाधिकारियों, पार्षदों व कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई प्रदेश के शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर विचाराधीन है।
संजय नरूका

जिलाध्यक्ष, भाजपा अलवर

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