अलवर. तिजारा. चंद्रप्रभ दिगंबर जैन मंदिर में अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक सम्मेलन के दूसरे दिन तकनीकी सत्रों में विभिन्न विषयों पर विद्वत-जनों ने अपनी शोध-प्रस्तुतियां अर्पित की और वैज्ञानिक अवधारणाओं की जैन सिद्धांतों के आलोक में समीक्षा करते हुए उनकी वस्तुनिष्ठता को रेखांकित किया। प्रमुख रूप से जैन धर्म, दर्शन और सिद्धांत की समीक्षा करते हुए यह अभिव्यक्त किया गया कि यह प्राचीन धर्म-दर्शन पूर्णत: वैज्ञानिक है।
आचार्य ज्ञानसागर महाराज ने कहा कि आज इस बात की अवश्यकता है कि आगम ग्रंथों में निबद्ध अपर ज्ञान को आधुनिक और वैज्ञानिक दृष्टिकोण से प्रस्तुत किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से कास्मोलॉजी, कर्म-सिद्धांत और नाभिकीय भौतिकी, जीव विज्ञान, गणित, पर्यावरण विज्ञान आदि क्षेत्रों में जैन विद्या की दृष्टि से नई खोज के किए जाने की आवश्यकता पर बल दिया। विदित हो कि इससे पूर्व एचएएल के पूर्व अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक टी सुवर्ण राजू तथा भारतीय दर्शन परिषद के पूर्व अध्यक्ष प्रो. एसआर भट्ट ने आचार्यश्री द्वारा सृजित एन इनसाइट का लोकार्पण किया था। इसके साथ ही अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में प्रस्तुत किए गए शोधलेखों का प्रकाशित सार-संक्षेप भी लोकार्पित किया गया।
तकनीकी सत्रों के प्रबोधनों में प्रमुखतया जैन योग की विषद परंपरा पर व्यापक चिंतन प्रस्तुत करते हुए मानव मस्तिष्क की विविध जैविक क्रियाओं पर उसके प्रभाव की समीक्षा की गई। लोक के रचनात्मक स्वरूप की जैन अवधारणाओं के वैज्ञानिक सामीप्य पर चिंतन प्रस्तुत हुआ और इन अवधारणाओं की पुष्टि के लिए गणितीय मॉडल भी प्रस्तुत किए गए। लोक में व्याप्त शाश्वत एवं अशाश्वत रचनाओं की व्याख्याएं प्रस्तुत की गई। दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में ३५ शोध पत्रों का वाचन किया गया।
सम्मेलन में संयुक्तराज्य अमेरिका से डॉ. सुश्री एलेन गौफ, इंग्लैंड से डॉ. प्रतिभा प्रज्ञा, डॉ. विपुल प्रज्ञा, एलिस जौर्जेव, सुश्री क्लौडिया बुसीनारो, प्रो. जियो ल्योंग ली दक्षिण कोरिया, डॉ. ल्यूटगार्ड सोनी, ऑस्ट्रिया, डॉ. जयेन्द्र सोनी-ऑस्ट्रिया, डॉ. वोल्क्मार एंसलीन थाईलैंड, सुश्री कोरीना ल्होइर जर्मनी, सुश्री रेना सान ऑस्ट्रेलिया, जैन 108 ऑस्ट्रेलिया व डॉ. जोसेफ बारटेसोक चेक गणराज्य ने भाग लिया। इसमें आठ देशों के इन बारह वरिष्ठ विज्ञानवेत्ताओं के अलावा भारत के ३५ विद्वानों ने इस दो दिवसीय संगोष्ठी में भाग लिया। प्रमुख भारतीय विज्ञानवेत्ताओं में डॉ. सुंदरसिंह पोखरना, डॉ. नारायणलाल कछारा, डॉ. जीवराज जैन, प्रो. एके जैन, प्रो. अशोक जैन, डॉ. एन. शिवकुमार, प्रो. पारसमल अग्रवाल, डॉ. सोहनराज तातेड़, प्रो. जीसी जैन, प्रो. एलसी जैन, सुश्री मेधावी जैन, डॉ. श्रेयांस जैन आदि शामिल रहे।





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