Breaking News
recent

जयपुर बम विस्फोट कांड पर फैसला आज, 11 साल 07 माह और 05 दिन बाद पीडि़तों को मिलेगा इंसाफ

जयपुर। जयपुर में 13 मई 2008 को हुए सिलसिलेवार बम विस्फोट ( Jaipur Bomb Blast 2008 ) के मामले पर आज फैसला सुनाया जाना है। विशेष न्यायालय जयपुर बम विस्फोट ( 2008 Jaipur bomb blasts ) में पांचों आरोपियों को पेश किया जाएगा। इस आतंकी घटना में 71 लोगों की मौत हुई थी, 185 लोग घायल हुए थे। मामले में लखनऊ और दिल्ली से कुल 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। घटना के 11 साल 7 महीने और 5 दिन बाद अब मामले पर विशेष न्यायालय से फैसला आने वाला है। इस बीच 5 न्यायाधीशों ने सुनवाई की और 4 विशेष लोक अभियोजकों ने जयपुर का पक्ष रखा। न्यायालय में कुल 1293 गवाह पेश किए गए।

इन पर हैं आरोप
न्यायालय में मोहम्मद शहबाज हुसैन, मोहम्मद सैफ उर्फ कैरीऑन, मोहम्मद सरवर आजमी, मोहम्मद सलमान, सैफुर उर्फ सैफुर्रहमान अंसारी पर फैसला होगा। पांचों आरोपी जयपुर के केंद्रीय कारागार में बंद हैं। आरोपी मोहम्मद आतीफ अमीन उर्फ बशीर और छोटा साजिद बाटला एनकाउंटर में मारे जा चुके हैं। मिर्जा शादाब बैग उर्फ मलिक, साजिद बड़ा, मोहम्मद खालिद अब भी फरार हैं। अन्य आरोपी आरिज खान उर्फ जुनैद दिल्ली पुलिस की हिरासत में है।

यहां-यहां रखे थे बम
जयपुर पहुंचने पर सभी ने परिवर्तित हिंदू नामों से साइकिल खरीदी और विस्फोटक वाला बैग रखकर पहले से चिह्नित जगहों पर खड़ी करके विस्फोटक में टाइमर के सैल लगा दिए। फिर ट्रेन से दिल्ली के लिए रवाना हुए। राजस्थान एटीएस की पूछताछ में सैफ ने बताया कि उसने माणक चौक खंदा, बड़ा साजिद ने खंदा चूडीवाला, छोटा साजिद ने जौहरी बाजार और सलमान ने सांगानेरी गेट हनुमान मंदिर पर साइकिल बम रखे थे।

21 जनवरी 2009 को मोहम्मद सरवर आजमी यूपी में पकड़ा गया था। पूछताछ में उसने पुलिस को बताया कि चांदपोल हनुमान मंदिर के सामने उसने बम रखे थे। सैफूर्रहमान के एमपी में पकड़े के बाद 13 अप्रेल 2009 को एटीएस ने गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने फूल वालों का खंदा छोटी चौपड़ पर बम रखना स्वीकार किया। दिल्ली में 23 नवंबर 2010 को पकड़ा गए सलमान ने सांगानेरी गेट हनुमान मंदिर के पास बम रखने की बात कही। उसने बताया कि करीब ढाई साल पहले जयपुर दस लोग आए थे। हनुमान मंदिर के पास प्याऊ व डाक के डिब्बे के बीच बम रखने की निशानदेही की थी।

11 को रैकी और 13 को दहला दिया
बम धमाकों के अगले दिन 14 मई को धमाकों की जिम्मेदारी का एक ई-मेल इंडियन मुजाहिद्दीन के नाम से जारी हुआ था। तफ्तीश में सामने आया कि उत्तरप्रदेश के साहिबाबाद स्थित एक कम्प्यूटर जॉब वर्क की दुकान से यह जारी हुआ था। तीन महीनों की तफ्तीश के बाद 25 अगस्त 2008 को शहबाज हुसैन को यूपी पुलिस ने पकड़ा। इसके बाद 19-09-2008 को बटला हाउस मुठभेड़ में दिल्ली पुलिस ने मोहम्मद सैफ को पकड़ा था। इसके बाद अन्य आरोपियों का पता चला।

मोहम्मद सैफ से दिल्ली पुलिस में एसीपी स्पेशल सेल संजीव कुमार ने पूछताछ की। पूछताछ में सैफ ने बताया कि 13 मई 2008 को जयपुर में हुए बम धमाकों में वह खुद, आरिज खान उर्फ जुनैद, मिर्जा शादाब बैग, मोहम्मद खालिद, सैफूर्रहमान, साजिद छोटा, साजिद बड़ा, सलमान, सरवर व मोहम्मद आतिफ अमीन के साथ बम रखने में शामिल था।

- न्यायालय में एक-एक गवाह के बयान से आरोप साबित होते हैं। हमने दस्तावेजी और अन्य साक्ष्य पेश किए हैं। मामले में लिखित तर्क और सुप्रीम कोर्ट के फैसले भी नजीर के तौर पर पेश किए गए हैं।
श्रीचंद, विशेष लोक अभियोजक



Rajasthan Darpan IFTTT

Rajasthan Darpan IFTTT

No comments:

Post a Comment

Powered by Blogger.