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कोटा में कॉफी विद कलक्टर: 11 आईएएस ने साझा की अपनी संघर्ष की दास्तां तो उत्साह से लबरेज हो गए कोचिंग विद्यार्थी

कोटा . मुझे अंग्रेजी नहीं आती थी... कलक्टर की बात तो छोड़ो कभी पटवारी के दफ्तर में भी नहीं घुसा था... आप नवीं दसवीं क्लास में इंजीनियर बनने कोटा आ गए, मैं बारहवीं के बाद भी तय नहीं कर पाया था कि क्या करना है... ग्रेजुएशन सैकंड ईयर में ख्याल आया कि देश आईएएस और आईपीएस के कंधों पर चल रहा है... थर्ड ईयर में जाकर सिविल सर्विसेज में जाने का फैसला किया, लेकिन खुद पर ही यकीन नहीं था... सोचा मैनेजमेंट का कोर्स कर लेते हैं किसी बैंक में तो नौकरी मिल ही जाएगी... लेकिन जब सलेक्शन हुआ तो पढ़ाई से लेकर बातचीत तक अंग्रेजी में... प्लानिंग से लेकर लेक्चर तक अंग्रेजी में... लगा अब गई भैंस पानी में... ठीक वैसी ही फीलिंग जैसी आपके इंजीनियरिंग और मेडिकल की तैयारी करते वक्त फिलहाल हो रही है...। मैं कुछ भी करने को राजी था, लेकिन मैदान छोडऩे को नहीं... खुद से वायदा किया अड़े रहो... बढ़ते रहो... कुदरत भी रात के बाद दिन ही तो लाती है। दिल्ली पहुंचा, सिविल सर्विसेज की तैयारी की... आईपीएस के लिए सिलेक्ट हुआ, लेकिन दोनों घुटनों ने साथ छोड़ दिया... हताश हो सकता था... डर सकता था... पीछे हट सकता था, लेकिन खुद से किया वायदा याद आया और आज आईएएस हूं।

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कोचिंग विद्यार्थियों को प्रेरित करने के लिए जिला कलक्टर ओम कसेरा की पहल पर शुरू हुए कार्यक्रम कॉफी विद कलक्टर का दूसरा आयोजन था... ( motivational camp for coaching students )

आईएएस विनोद दुहन ने जब अपने संघर्षों की दास्तां देशभर से कोचिंग करने कोटा आए विद्यार्थियों के साथ साझा की तो उसे सुन हर कोई उत्साह से लबरेज हो उठा। जिला कलक्टर ओम कसेरा और आईपीएस डॉ अमृता दुहन की मौजूदगी में कोचिंग छात्रों को राह दिखाने वाले दुहन अकेले नहीं थे, उनके साथ कोटा से ही कोचिंग कर पहले आईआईटी और फिर भारतीय प्रशासनिक सेवा में चयनित हुए अभिषेक सुराणा, उत्साह चौधरी, शिल्पा, देशलदान, अतुल प्रकाश, नित्या, डॉ. शुभमंगला, अभिषेक गुप्ता और मोहम्मद विहान आदि 11 आईएएस अधिकारी भी मौजूद थे। जिन्होंने विद्यार्थियों को अपने संघर्ष भरे जीवन के तमाम पहलुओं को साझा कर न सिर्फ सफलता हासिल करने के लिए प्रोत्साहित किया, बल्कि उन्हें जीवन के हर मोड़ पर नए लक्ष्य भी निर्धारित करने की राह दिखाई।
कार्यक्रम की शुरुआत करते हुए जिला कलक्टर ओम कसेरा ने विद्यार्थियों से पूछा कि आखिर सर्वश्रेष्ठ होता क्या है? जब दसवीं कक्षा में थे तब सर्वश्रेष्ठ फस्र्ट डिवीजन लाना था।

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कोटा आए तो क्लास में टॉप करना सर्वश्रेष्ठ बन गया और आगे आईआईटी, नीट या एम्स का एग्जाम टॉप करना सर्वश्रेष्ठ हो जाएगा और जब उसे भी क्रेक कर लेंगे तो मनचाही आईआईटी और ब्रांच, उसके बाद प्लेसमेंट और फिर न जाने क्या क्या सर्वश्रेष्ठ होता चला जाएगा। मतलब साफ है कि आपका सर्वश्रेष्ठ आपको खुद गढऩा है। कोई भी मंजिल स्थाई नहीं होती। जीवन के सफर के साथ लगातार बदलती रहती है और उसी के साथ बदलता जाता है हमारा सर्वश्रेष्ठ। एक स्थाई सर्वश्रेष्ठ साथ रहता है तो वह है जीवन और उसकी खुशियां। इसीलिए परिणाम जो भी हो, अपना सर्वश्रेष्ठ दो, बाकी बदलते वक्त पर छोड़ दो। आईपीएस अमृता दुहन ने विद्यार्थियों से कहा कि कभी मत सोचना कि आप अपने घर से दूर हो। कोटा आपका अपना है और हम सभी लोग आपके परिजन। सभी लोग चाहते हैं कि आप अपने जीवन में सफलता हासिल करें और पूरी तरह से तनाव मुक्त होकर पढ़ाई करें।

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चार घंटे से भी ज्यादा समय तक चले कार्यक्रम में सभी प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के सामने बच्चों ने खुलकर अपनी समस्याएं रखी और अपने डर पर काबू पाने, सफलता हासिल करने और संघर्ष के दौर में हौसला हासिल करने के तरीके सीखे। इस दौरान कोचिंग छात्रों ने प्रशासनिक अधिकारियों के साथ गाने गाए, डांस किया, कविताएं सुनाई और जमकर धमाल मचाया। कोटा म्यूजिक क्लब के गौरव गुप्ता आदि कलाकारों ने धमाकेदार संगीत प्रस्तुतियां दे सभी को झूमने के लिए मजबूर कर दिया।



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