Breaking News
recent

33 साल में तीन ही लिपिक बढ़े, पांच साल में 100 ग्राम पंचायत बढ़ गई

अलवर. सरकार को ग्राम पंचायत बढ़ाने की पूरी चिंता रही, लेकिन इन ग्राम पंचायतों में सरकार की योजनाओं को क्रियान्वित करने के लिए कर्मचारियों की लगातार घटती संख्या पर किसी का ध्यान नहीं। यही कारण है कि पिछले पांच साल में अलवर जिले में करीब 100 ग्राम पंचायतें बढ़ गई, लेकिन जिला परिषद के ग्रामीण विकास प्रकोष्ठ (डीआरडीए) में 33 साल से भर्ती ही नहीं हुई।

राज्य सरकार की ओर से संचालित सांसद निधि, विधायक निधि, मेवात विकास योजना, जन सहभागिता योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, स्टोर, पीए सेल, कैश, आवक जावक शाखा, स्मार्ट विलेज, संस्थापन शाखा, कोर्ट केस, स्वविवेक धन लक्ष्मी केन्द्र सहित अन्य योजनाएं शामिल हैं। इन योजनाओं में प्रतिवर्ष करोडों रुपए का बजट आवंटन होता है। इन योजनाओं के बजट से ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्य कराने एवं सरकारी राशि के सही उपयोग की मॉनिटरिंग, राशि के उपयोगिता प्रमाण पत्र आदि एकत्र कर वापस से सरकार को आवंटित राशि का हिसाब देने का जिम्मा डीआरडीए व जिला परिषद कर्मचारी व अधिकारियों को सौंपा है। अलवर जिले में इन योजनाओं में एक साल में कई सौ करोड़ की राशि आवंटित होती है।

पांच साल में 478 से 578 ग्राम पंचायत हो गई

सरकारी नौकरियों के प्रति भले ही सरकार का ध्यान नहीं हो, लेकिन गांवों में राजनीति चमकाने के लिए ग्राम पंचायत व पंचायत समितियों की संख्या बढ़ाने में जरा भी हिचक नहीं है। यही कारण है कि अलवर जिले में वर्ष 2014 में कुल ग्राम पंचायतों की संख्या 478 थी, जो बाद में परिसीमन में वर्ष 2015 में बढकऱ 512 तक पहुंच गई। ग्राम पंचायतों की संख्या बढ़ाने का सिलसिला यहीं नहीं थमा और वर्ष 2019 में हुए परिसीमन में ग्राम पंचायतों की संख्या बढकऱ 578 हो गई। यानि पांच साल में अलवर जिले में ग्राम पंचायतों की संख्या में करीब 100 तक वृद्धि हो गई।

दो पंचायत समिति भी बढ़ गई

पांच साल के दौरान अलवर जिले में पंचायत समितियों की संख्या भी बढ़ गई। वर्ष 2014 में अलवर जिले में 14 पंचायत समितियां थी, वहीं वर्ष 2019 के परिसीमन में पंचायत समितियों की संख्या बढकऱ 16 तक पहुंच गई। इसी वर्ष राज्य सरकार ने जिले में गोविंदगढ़ व मालाखेड़ा नई पंचायत समिति सृजित की हैं।

योजना संचालन को बचे 4 लिपिक

जिले में 16 पंचायत समितियां एवं 578 ग्राम पंचायतों में सरकार की विभिन्न योजनाओं के संचालन के लिए डीआरडीए में स्टाफ के नाम पर केवल चार कनिष्ठ लिपिक रह गए हैं। उनमें भी एक लिपिक रोकड़ शाखा के कार्य में लगा है। यानि तीन लिपिकों के भरोसे पूरा ग्रामीण विकास विभाग चल रहा है। हालात यह है कि किसी एक लिपिक के अवकाश पर जाने मात्र से ही कार्यालय की व्यवस्था गड़बड़ा जाती है। वर्तमान में डीआरडीए कार्यालय में वाहन चालक के दो पद, सहायक कर्मचारियों के तीन, स्टेनोग्राफर का एक, कनिष्ठ लिपिक के चार व वरिष्ठ लिपिक का एक पद रिक्त है। डीआरडीए में अंतिम बार भर्ती वर्ष 1987 में हुई है।

भर्ती की जरूरत

डीआरडीए में विभिन्न योजनाओं के कार्य संचालन के लिए कर्मचारियों की नई भर्ती करने की जरूरत है। ग्राम पंचायत व पंचायत समिति बढऩे के साथ ही विभागीय कार्य में भी वृद्धि हुई है। विभाग का कार्य सुचारू रूप से संचालित करने के लिए कर्मचारियों की संख्या बढ़ाना जरूरी है।

पंकज शर्मा

जिला संयोजक, डीआरडीए कर्मचारी संघ अलवर



Rajasthan Darpan IFTTT

Rajasthan Darpan IFTTT

No comments:

Post a Comment

Powered by Blogger.