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50 पैसे की टॉफी ग्राहक को देना पड़ा भारी, अब देना होगा 6 हजार का हर्जाना

जयपुर। अगर कोई विक्रेता आपसे 50 पैसे भी अधिक वसूलता है तो वह उसका सेवादोष है। भले ही यह रकम आपको छोटी लगे, लेकिन उपभोक्ता मंच ( Jila Upbhokta Manch ) में आप मजबूत साक्ष्यों के साथ जाएंगे तो मनमानी करने वाले विक्रेताओं के विरुद्ध ही फैसला आएगा। ‘राउंड ऑफ’ के नाम पर 10-20-50 पैसे भी अधिक वसूलना सही नहीं है। सीकर रोड स्थित विशाल मेगा मार्ट के विरुद्ध भी ऐसा ही मामला सामने आया है। हीरापुरा निवासी प्रमोद कुमार घोड़ेला ने वर्ष 2011 में जिला उपभोक्ता मंच तृतीय ( District Consumer Forum ) में एक परिवाद दिया था। परिवाद में उसने बताया कि विपक्षी फर्म से उसने 143 रुपए 50 पैसे में कुछ सामान खरीदा था, लेकिन फर्म ने 50 पैसे अधिक 144 रुपए वसूल किए। मंच में विपक्षी फर्म ने दलील दी कि भारतीय रिजर्व बैंक ने 50 पैसे या इससे अधिक पैसे को ‘राउण्ड ऑफ’ करना वैध बताया है। सामान्य व्यापारिक प्रक्रिया और मुद्रा की असुविधा की वजह से 50 पैसे की टॉफी ग्राहक को दी।

6 हजार हर्जाना देने के आदेश
मंच के पीठासीन अधिकारी केदार लाल गुप्ता और भावना भाटी ने 12 दिसंबर को दिए फैसले में लिखा कि प्रकरण 2011 का है और उस वक्त 50 पैसे का प्रचलन बंद नहीं हुआ था। अधिक वसूली गई राशि सेवादोष है। मंच ने विपक्षी फर्म को परिवाद की दिनांक से 50 पैसे नौ प्रतिशत ब्याज दर और 6 हजार रुपए हर्जाने के रूप में परिवादी को देने के आदेश दिए हैं।

इन्होंने भी अधिक वसूले, लगाया हर्जाना
शास्त्री नगर निवासी राजेन्द्र गुप्ता ने रिलायंस रिटेल के विरुद्ध जिला उपभोक्ता मंच प्रथम में 2015 में परिवाद दिया था। परिवादी ने विपक्षी के स्टोर से बिस्किट का पैकेट लिया था और उस पर पांच प्रतिशत छूट भी थी। इसके बावजूद परिवादी से 1.30 रुपए अधिक वसूले गए। विपक्षी फर्म ने मामले में जवाब भी प्रस्तुत नहीं किया। पीठासीन अधिकारी जैनेन्द्र कुमार, प्रतिभा शर्मा व नीलम शर्मा ने फर्म को 1.30 रुपए ब्याज सहित लौटाने एवं 6 हजार रुपए हर्जाना देने के आदेश दिए हैं। उपभोक्ता मंच चतुर्थ में भी न्यू सांगानेर रोड स्थित रिलायंस रिटेल के विरुद्ध 2017 में परिवाद पेश हुआ था। शास्त्री नगर निवासी वीरेन्द्र सिंह ने मंच को बताया कि स्टोर से दिवाली ऑफर के तहत चीनी खरीदी थी। फर्म ने उससे 3.18 रुपए अधिक वसूले। पीठासीन अधिकारी एनपी भंडारी, विनोद सैनी व पूजा मित्तल ने आदेश दिया कि विपक्षी फर्म अधिक वसूली राशि नौ प्रतिशत ब्याज दर एवं 6 हजार रुपए हर्जाने के रूप में परिवादी को देगी।



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