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7 गुना ज्यादा लेंगे सूरज और हवा से बिजली, इलेक्ट्रिक वाहनों को मिलेगी रफ्तार

भवनेश गुप्ता
जयपुर। राज्य में सौर व पवन ऊर्जा के उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए नई नीति आखिर प्रभावी हो गई। सरकार ने अगले पांच साल में प्राकृतिक बिजली उत्पादन 4600 मेगावॉट से बढ़ाकर 30 हजार मेगावॉट करने का दावा किया है। इस नीति में पहली बार सोलर पार्क लगाने वाली बड़ी कंपनियों-निवेशकों को 50 फीसदी दर पर जमीन देने से लेकर कई अन्य बड़ी रियायत दी गई है। दोनों नीति में सरकार ने सीलिंग की कुछ बंदिश के साथ इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी, ट्रांसमिशन चार्ज, व्हीलिंग चार्ज में बड़ी छूट भी देने का प्रावधान किया गया। हालांकि, यह छूट 7 से 10 साल तक होगी। इसके बाद दोबारा नीति की समीक्षा होगी। इसके अलावा सोलर-विंड हाईब्रिड पॉवर प्रोजेक्ट का कंसेप्ट लाया गया है। इसमें निवेशक एक ही जगह दोनों तरीकों से ऊर्जा उत्पादन कर सकेंगे।

खास यह है कि राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों के चार्जिंग स्टेशनों को भी बड़ी छूट मिलेगी। ऐसे स्टेशनों को सोलर एनर्जी से रोशन करने के लिए न केवल रियायती दर पर जमीन मिलेगी बल्कि कई शुल्क में शत प्रतिशत छूट दी गई है। इसके अलावा सौर व पवन उर्जा का स्टोरेज करने पर मुख्य रूप से फोकस किया गया है। जो भी कंपनियां प्लांट लगाएंगी, उन्हें स्टोरेज की अत्याधुनिक संसाधन लगाने होंगे। कारण, अभी स्टोरेज नहीं होने इसका पूरा फायदा राज्य को नहीं मिल पा रहा है। राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम ने सभी 33 जिला मुख्यालयों को ग्रीन सिटी के रूप में विकसित करने का सुझाव दिया था, जिसे सरकार ने मान लिया। इस बीच सरकार ने रिन्यूएबल एनर्जी डवलपमेंट फंड की राशि को 1 लाख से बढ़ाकर 2 लाख रुपए प्रति मेगावॉट सालाना कर दिया है। इसके जरिए सरकार की तिजोरी में दोगुना राजस्व आएगा। बिड़ला सभागार में हुए समारोह में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने रिलायंस के राजस्थान में सोलर प्लांट में निवेश के संकेत भी दे दिए। उर्जा मंत्री बी.डी. कल्ला ने नई नीति के बारे में बखूबी समझाया। राजस्थान अक्षय ऊर्जा निगम के एमडी अनिल गुप्ता भी मौजूद रहे।

सोलर मैन्यूफेक्चरिंग यूनिट की खुली राह
सौर और पवन ऊर्जा के उत्पादन के साथ-साथ इनके उपकरणों की मेन्यूफेक्चरिंग का दायरा भी बढ़ा दिया गया है। ऐसे निवेशकों को रियायती दर पर जमीन दी जाएगी। स्टॉम्प ड्यूटी शत प्रतिशत माफ करने, इलेक्र्टिसिटी ड्यूटी दस साल तक नहीं लेने के साथ-साथ जीएसटी में राज्य हिस्सा राशि की कुछ रोकड़ लौटाने का प्रावधान किया गया है। एम्प्लॉयमेंट और इंटरनेट सब्सिडी भी मिलेगी। ऊर्जा मंत्री बी.डी कल्ला भी इसकी जरूरत जता चुके हैं।

33 शहर बनेंगे ग्रीन सिटी..
सभी 33 जिला मुख्यालयों को ग्रीन सिटी के रूप मेंं विकसित करने का दावा किया गया है। इसके लिए पांच साल में 300 मेगावॉट के रूफटॉफ सोलर पैनल लगाए जाएंगे। इसमें निजी व सरकारी भवन दोनों शामिल है। इसके अलावा सोलर प्लांट के लिए सरकारी इमारतों को अब कॉमर्शियल के बजाय रिहायशी श्रेणी में माना जाएगा। इससे यहां से उत्पादित होने वाली बिजली का पैसा भी डिस्कॉम देंगे। अभी तक कॉमर्शियल प्रॉपर्टी मानते हुए बची हुई बिजली का न तो पैसा मिल रहा था और न ही बिजली वापिस दी जा रही थी।

बड़े उद्योगों को रियायत
कैप्टिव सेम प्रिमाइस : इसमें उद्योग संचालित जगह पर ही सोलर प्लांट लगाकर बिजली उत्पादन करने वाले उद्योगपतियों को राहत दी गई है। इसके तहत यहां अतिरिक्त बिजली ग्रिड में जाने के बाद 90 प्रतिशत वापिस मिल सकेगी। दस प्रतिशत चार्ज के रूप में कटौती होगी। अभी तक उद्योग संचालन में उपयोग आने के बाद बची हुई बिजली ग्रिड में चली जाती है, जिसका उपयोग उद्योग संचालनकर्ता वापिस नहीं कर पा रहे थे। भिवाड़ी सहित कई इण्डस्ट्री हब में निवेश कर रहे बड़े प्लेयर इसमें छूट की मांग करते रहे हैं।
-गोदामों की छतों को ज्यादा उपयोग बनाने के लिए ग्रोस मीटर स्कीम।
-अब उद्यमी अपनी खाली जगह पर आसानी से प्लांट लगा सकेंगे। वहां से इण्डस्ट्री तक बिजली लाने का खर्च कम होगा। कैप्टिव सोलर प्लांट में इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी अगले सात साल के लिए माफ की गई है।

डवलपमेंड फंड से दोगुनी रोकड़ जुटाएगी सरकार
रिन्यूएबल एनर्जी डवलपमेंट फंड की राशि को 1 लाख से बढ़ाकर 2 लाख रुपए प्रति मेगावॉट सालाना कर दिया है। इसके जरिए सरकार की तिजोरी में दोगुना राजस्व आएगा। सरकार ने ड्रॉफ्ट पॉलिसी में इसे 5 लाख रुपए किया गया था लेकिन निवेशकों की आपत्ति के बाद इस आंकड़े को कम किया गया। हालांकि, इस फंड के जरिए जुटाई जा रही राशि का उपयोग भी इसी सेक्टर में करने की मांग की जाती रही है लेकिन सरकार ने फिलहाल स्थिति साफ नहीं की है।

सोलर-विंड हाईब्रिड पॉवर प्रोजेक्ट : एक ही जगह सौर व पवन ऊर्जा का उत्पादन..
सोलर और विंड के जरिए बिजली उत्पादन एक साथ हो सकेगा। जहां पवन ऊर्जा के प्लांट हैं, उसी परिसर में सौर ऊर्जा के प्लांट भी लग सकेंगे। यह प्रावधान सौर ऊर्जा की जमीन के लिए किया गया है। अभी तक इसकी अनुमति नहीं थी। इसके पीछे मंशा है कि कि जमीन का दोहरा उपयोग हो और ट्रांसमिशन लॉस कम से कम किया जा सके।

चार्ज से छूट पर सीमित समय के लिए, बंदिश भी लगाई...
इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी- 40 पैसे प्रति यूनिट
व्हीलिंग चार्ज- 1.25 रुपए प्रति यूनिट
ट्रांसमिशन चार्ज- 1 रुपए प्रति यूनिट
(इसमें 7 से 10 साल तक के लिए शुल्क माफ किया गया है। हालांकि,व्हीलिंग और ट्रांसमिशन चार्ज की छूट में 500 मेगावॉट की बंदिश भी कर दी गई। यानि, पांच सौ मेगावॉट के बाद लगने वाले प्लांट पर पूरा शुल्क देना पड़ेगा)

पवन ऊर्जा पर भी फोकस
-पवन ऊर्जा की पुरानी मशीनों को अत्याधुनिक मशीनों से बदला जाएगा। यह अनिवार्य होगा। अभी 250 किलोवॉट क्षमता तक की पुरानी मशीन लगी हुई हैं।
-जो भी प्रदेश में आकर प्लांट लगाएंगे, उन्हें जमीन उपलब्ध कराने से लेकर अन्य सुविधाएं मुहैया कराने पर फोकस रहेगा। किसी भी कारण से उन्हें चक्कर नहीं खाने पड़े, इसे प्रावधान किए गए हैं। इसमें पार्क विकसित करने से लेकर जमीन लेने, प्लांट लगाने के चार्ज में छूट।

राज्य में यह है स्थिति...
(1) सौर ऊर्जा..
-150 लाख यूनिट प्रतिदिन उत्पादन हो रहा है राज्य में
-2500 मेगावाट (प्रतिदिन) तक उत्पादन क्षमता के प्लांट संचालित हैं यहां

(2) पवन ऊर्जा...
-225 लाख यूनिट प्रतिदिन उत्पादन हो रहा है राज्य में
-4400 मेगावाट (प्रतिदिन) तक उत्पादन क्षमता के प्लांट संचालित हैं यहां

(3) थर्मल प्लांट..
- 2000 से 2200 लाख यूनिट बिजली आपूर्ति प्रतिदिन की जा रही है थर्मल पॉवर प्लांट के जरिए
- 1 से 2 लाख यूनिट की खरीद की जा रही है

Expert Comment..

-यह इण्डस्ट्री के लिए अच्छी पॉलिसी है। जनता को भी इसका सीधा लाभ मिलेगा। सौर ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए ऐसी ही पॉलिसी की जरूरत थी। इलेक्ट्रिक व्हीकल को बढ़ावा देने की बात हो या फिर कैप्टिव सेम प्रीमिसेस के तहत काम कर रहे बड़े उद्योगों को राहत देने काम, दोनों दिशा में सोचा गया। जिला मुख्यालय को ग्रीन सिटी में तब्दील करने का अच्छा कदम है। अब देखना यह है कि रेगुलेशन किस तरह तैयार कर प्रभावी किए जाते हैं।

-सुनील बंसल, महासचिव, राजस्थान सोलर एसोसिएशन



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