उदयपुर/ फलासिया. udaipur road network पंचायत समिति क्षेत्र में सरवण गांव तक सड़क का सपना बुनते हुए न जाने कितनी की जिंदगियां काल का ग्रास हो गई। नई पीढ़ी के प्रयासों से जैसे-तैसे इस सड़क को मंजूरी मिली तो घटिया निर्माण ने सपनों की सड़क को कंकरीला बनाकर मुश्किल भरा बना दिया है। जी हां! कुछ ऐसा ही सच है सरवण गांव की सड़क से जुड़ी असलियत का। मूलभूत सुविधाओं की मांग कर रहे क्षेत्रवासियों को पहले वनविभाग क्षेत्र में सड़क बनाने के लिए अनापत्ति प्रमाण-पत्र जुटाने में वर्षों गुजर गए। बाद में लोक निर्माण विभाग ने लोगों की मांग पर निविदा प्रक्रिया पूरी कर करीब 2.67 किलोमीटर डामरीकरण सड़क निर्माण का ठेका किया। बता दें कि प्रयासों के बाद बनी यह सड़क महज तीन माह में ही दम तोड़ चुकी है। घटिया निर्माण के बीच पूरी सड़क से डामर हट गया है और गिट्टी 'कांटोंÓ की तरह पहियों को पंक्चर करने के साथ राहगीरों के लिए मुसीबत बन रही है। एक बार फिर आबादी इलाके तक पहुंच का मार्ग परेशानी खड़ी कर रहा है। वन क्षेत्र को जोडऩे वाली सड़क की इस बर्बादी को लेकर जिम्मेदारों ने भी मुंह मोड़ रखा है। बता दें कि सड़क निर्माण और कार्य समाप्ति के बाद से इस सड़क की देखरेख का जिम्मा संवेदक के हिस्से है।
मोबाइल नंबर के नाम पर 'धोखाÓ
खास बात यह है कि लोक निर्माण विभाग के कायदों के अनुसार संविदा एजेंसी की ओर से सड़क की शुरुआत और अंत में आवश्यक सूचना पट्ट लगाकर इसके निर्माण का विवरण दिया गया है। इस पर संवेदक एजेंसी के प्रतिनिधि का मोबाइल नंबर भी है, जो कि केवल दिखावटी है। समस्या ग्रस्त ग्रामीणों की ओर से लगातार संबंधित नंबर पर संपर्क साधने का प्रयास होता है, लेकिन संबंधित नंबर हमेशा बंद ही रहता है। दूसरी ओर ग्रामीणों की समस्याओं का हल तलाशने में विभागीय जिम्मेदार भी बचते हैं।
कब बनी और कब बिखरी
हमारे लिए सड़क कब बनी और कब टूटी पता ही नहीं चला। समस्या जस की तस मुंह बाए हुए है। आजादी के बाद से पहली बार बनी सड़क को लेकर गांव में खुशी आई थी, लेकिन घटिया निर्माण ने सपनों की इस दुनिया में ग्रहण लगा दिया। हीरालाल कसौटा, वार्डपंच, सरवण
घाट सेक्शन में समस्या
सरवण गंाव को जोडऩे वाली सड़क पर खासे घाट सेक्शन हैं। कुछ मोड़ वाले हिस्सों में सड़क उखडऩे की शिकायत मिली है। बिना देर लगाए संबंधित संवेदक को व्यवस्था सुधार के लिए पाबंदित किया है। udaipur road network मैं खुद सड़क देखकर आया हूं।
भूरसिंह मीणा, सहायक अभियंता, लोक निर्माण विभाग





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