जयपुर।
राज्य सभा में नागरिकता संशोधन बिल 2019 पेश करने के दौरान गृह मंत्री अमित शाह ने राजस्थान का ज़िक्र क्या किया, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने तुरंत पलटवार कर दिया। सीएम गहलोत ने अमित शाह के राजस्थान के सन्दर्भ में दिए वक्तव्य को दुर्भाग्यपूर्ण और गुमराह करने वाला करार दिया।
'राजस्थान में दो धर्म के 13 हज़ार को दी नागरिकता': शाह
गृह मंत्री अमित शाह ने नागरिकता संशोधन बिल पर अपनी बात रखते हुए कहा, 'राजस्थान में पाकिस्तानी शरणार्थियों को नागरिकता दी गई है। राजस्थान की सीमा में जो आए कांग्रेस पार्टी ने उन्हें दो बार रियायत दी है। वहां दो ही धर्म के 13 हजार लोग देश के नागरिक बने हैं। कांग्रेस की सरकार ने यह किया है। कांग्रेस ने जो किया वह विपक्ष को नहीं दिखेगा। कांग्रेस मुस्लिमों को न डराए। कांग्रेस पार्टी के प्रस्ताव में भी कहा गया है कि सीमा पार के गैर मुस्लिमों को संरक्षण देने के पक्ष में हैं। महात्मा गांधी ने भी इन लोगों को नागरिकता देने की वकालत की थी।
'मेरा रेफरेंस देकर गुमराह कर रहे शाह': सीएम गहलोत
सीएम अशोक गहलोत ने कहा है कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश के गृह मंत्री राज्यसभा में मेरा रेफरेंस देकर देश को गुमराह कर रहे हैं। हमने तो पाकिस्तान से सीमावर्ती राजस्थान आए शरणार्थियों की बरसों से जो मांग थी, चाहे वो हिंदू थे या सिख थे, उसे लेकर पहल की। हमने उस वक्त में तत्कालीन गृहमंत्री पी. चिदंबरम को पत्र लिखा, अगर हिंदू और सिख के अलावा और कोई भी होते तो उनके लिए भी हम यही सिफारिश करते। इंदिरा गांधी के वक्त में 1971 में मैं खुद बंगाल बॉर्डर पर रहा था, उस समय भी जो शरणार्थी आए थे, चाहे जिस भी धर्म के लोग थे, हमने सभी की सेवा की, शरणार्थी चाहे यहां के हों या वहां के हों, हमारे भाव हमेशा यही रहे हैं।'
'संविधान और लोकतंत्र के खिलाफ नागरिकता संशोधन बिल'
नागरिकता संशोधन बिल (कैब) का विरोध करते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि मोदी सरकार इस बिल के जरिए संविधान पर हमला कर रही है। कांग्रेस इस बिल का कड़ा विरोध करती है। ये बिल लोकतंत्र के खिलाफ है।
'ध्यान भटकाने की राजनीति...अर्थव्यवस्था बेहाल'
मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि नागरिकता संशोधन बिल पर भाजपा की ओर से राजनीति की जा रही है और ये देशहित में नहीं है। जब से भाजपा की सरकार बनी है, देश में कई तरह की समस्याएं बढ़ रही है। हर मामले पर ध्यान भटकाने के लिए भाजपा राजनीति कर रही है। मोदी और उनके साथियों को चिंता ही नहीं है कि अर्थव्यवस्था कहां जा रही है। प्याज और पेट्रोल के दाम आसमान पर है। जीडीपी की दर कम हो गई है। बेरोजगारी बढ़ती जा रही है।
'बोलने की आजादी खत्म...डरे-सहमे लोग'
मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि लोगों की बोलने की आजादी खत्म हो रही है, सब लोग डरे और सहमे हुए है। नागरिकता संशोधन विधेयक में विपक्ष की बात नहीं सुनी जा रही है। धरने, प्रदर्शन हो रहे है। कश्मीर के हालात खराब है। भाजपा की पोल खुल रही हैं। लोग समझ रहे है। हरियाणा और महाराष्ट्र के विधानसभा चुनाव नतीजों से ये साफ हो गया है। जनता इनकी चालबाजी जान गई है। गहलोत ने कहा कि नागरिकता बिल में इतना बड़ा संशोधन कर रहे हैं, किसी से पूछा तक नहीं।
इधर पायलट बोले, 'धर्म के नाम पर नागरिकता गलत'
डिप्टी सीएम और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट ने कहा है कि भारत का धर्म के नाम पर बंटवारा किया जा रहा है। धर्म के नाम पर नागरिकता दी जा रही है। दुनिया में ऐसा उदाहरण कहीं नहीं मिलता। संविधान के आर्टिकल 14 में कहीं नहीं लिखा है कि नागरिकता धर्म के आधार पर होगी। अगर किसी का चरित्र ठीक नहीं है, अगर किसी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई हो चुकी है या भारत के धर्म के विश्वास नहीं रखता हो वह भारत का नागरिक नहीं हो सकता है, लेकिन केंद्र की भाजपा सरकार धर्म के नाम पर नागरिकता दे रही है जिसका कांग्रेस विरोध कर रही है। पायलट ने कहा कि देश में रोजगार बंद हो गए हैं ,कारखाने ठप हो गए हैं उस पर किसी का ध्यान नहीं है। ध्यान भटकाने के लिए तरह-तरह के विधेयक और संशोधन बिल लाकर देश की जनता का ध्यान भटकाया जा रहा है। इसके विरोध में हम 14 दिसंबर को दिल्ली में ऐतिहासिक रैली करेंगे।
... और राज्य सभा से भी पास हो गया बिल
तमाम विरोध के बावजूद संसद में नागरिकता संशोधन बिल पास हो गया। राज्यसभा में सरकार ने अग्निपरीक्षा पास कर ली, वहीं विपक्ष एक बार फिर एकजुट नहीं हो पाया। बिल के पक्ष में 125 तो विरोध में 105 वोट पड़े। मोदी सरकार के बिल के समर्थन में बीजू जनता दल, एआईडीएमके, वाईएसआर, अकाली दल, जनता दल युनाइटेड, एलजेपी, एसडीएफ, एनपीएस, आरपीआइ और कई मनोनीत व निर्दलीय सांसदों का समर्थन मिला। वहीं लोकसभा में बिल का समर्थन करने वाली शिवसेना ने राज्यसभा से वाकआउट किया।
बिल को सेलेक्ट कमेटी का प्रस्ताव भी गिर गया। सेलेक्ट कमेटी भेजने के प्रस्ताव के पक्ष में 99 और विपक्ष में 124 वोट पड़े। इसके अलावा तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन, सुखेंदू रॉय समेत तमाम विपक्षी दलों के नेताओं दो दर्जन से ज्यादा संशोधन भी गिर गए।
नागरिकता की अब खुली राह, मनाया जश्न
राज्यसभा में नागरिकता संसोधन बिल पास होने के बाद राजधानी जयपुर में पांच हजार पाक विस्थापितों को इसका फायदा मिलेगा। उन्हें भारतीय नागरिकता लेने की प्रक्रिया में अब इंतजार नहीं करना पड़ेगा। राजधानी में करीब आठ हजार पाक विस्थापित हिंदू रहते हैं। इनमें से 2600 लोगों को 2004 तक नागरिकता दी गई थी। इसके बाद 150 लोगों को इस साल दी गई। वहीं राज्य इस साल में 134 लोगों को नागरिकता दी गई है। पाक विस्थापितों की नागरिकता के लिए संघर्ष कर रही निमित्तेकम संस्थान के जय आहूजा ने बताया कि बिल के पास होने से सबसे बड़ी राहत छह साल की मिलेगी। अभी तक नागरिकता के लिए 12 साल इंतजार करना होता था। इसे घटकर छह साल कर दिया गया है।
मुखिया को मिलती थी नागरिकता
सबसे पहले पाक विस्थापित परिवार के मुखिया के को नागरिता दी जाती है। इसके बाद परिवार के एक-एक सदस्य को नागरिकता दी जाती है। ऐसे में एक परिवार को नागरिकता लेने में चार साल तक लग जाते हैं। अब परिवार को राहत मिलेगी।
मनाया जश्न, आतिशबाजी की
नागरिकता संशोधन बिल के पक्ष में पाक विस्थापितों ने बुधवार को मानसरोवर में एकजुट होकर खुशियां मनाई। समस्त पाक विस्थापित हिन्दू व निमित्तेकम संस्था की ओर से कार्यक्रम रखा गया। सभी ने एकजुट होकर एक-दूसरे को बधाई दी और मिठाई खिलाई। देर रात तक जश्न मनाया। लोग शाम पांच बजे से ही बिल के पास होने का इंतजार कर रहे थे। खबर आते ही खुशी से झूम उठे।





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