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पोषाहार की जांच में लापरवाही, अधिकारी नहीं करते जांच

गौरव खण्डेलवाल

दौसा. बच्चों की सेहत को बेहतर बनाने के लिए विद्यालयों में दिए जाने वाले पोषाहार की जांच में अधिकारी लापरवाही बरत रहे हैं। अधिकारी सरकारी विद्यालयों में पोषाहार की जांच करने नहीं जाते हैं। यहां तक की आवंटित लक्ष्यों को भी गंभीरता से नहीं ले रहे। इस रवैये को राज्य सरकार ने गंभीरता से लिया है तथा मिड-डे-मील आयुक्त ने प्रदेश के सभी जिला कलक्टर्स को पत्र भेजकर निर्धारित लक्ष्य पूर्ति कराने को कहा है।

Negligence in nutritional investigation of mid day meal


सूत्रों के अनुसार राज्य स्तर पर मासिक निरीक्षण कार्यक्रम की समीक्षा करने पर पाया गया हैकि जिलों में विभिन्न अधिकारियों के लिए निर्धारित मापदण्डों के अनुसार निरीक्षण नहीं हो रहे हैं। वहीं किसी ने निरीक्षण भी किया है तो उसकी रिपोर्ट मिड-डे-मील आयुक्तालय को नहीं भेजी जा रही। इससे धरातल की स्थिति से सरकार वाकिफ नहीं हो पाती। इस पर सरकार ने जिला कलक्टर्सको पत्र भेजकर निर्देशित किया हैकि मासिक निरीक्षण पूरा किया जाए।

जिला कलक्टर, जिला परिषद सीईओ व जिला शिक्षा अधिकारी के निरीक्षण प्रपत्र सीधे आयुक्तालय भेजे जाएंगे। वहीं अन्य अधिकारियों की रिपोर्ट की जिला स्तर पर समीक्षा कर सूचना भेजी जाएगी। साथ ही जिला कलक्टर को गबन, अनियमितता, चोरी आदि के दोषियों के खिलाफकार्रवाईकरने व अवगत कराने के लिए भी कहा गया है।

निर्धारित मासिक लक्ष्य

अधिकारी निरीक्षण के लिए स्कूल
जिला कलक्टर 5
अति. जिला कलक्टर 5
एसडीओ.एसीएम 10
तहसीलदार 10
सभी जिला अधिकारी 5
सीईओ जिला परिषद 5
एसीईओ 5
जिला परिषद के अन्य अधिकारी 5
जिला शिक्षा अधिकारी 20
खण्ड शिक्षा अधिकारी 20
विकास अधिकारी 10
पीईईओ 5
शिक्षा प्रसार अधिकारी 20
पंचायत समिति के अन्य अधिकारी 5
सभी खण्ड स्तरीय अधिकारी 5
अधिशासी अधिकारी, नगर निकाय 10

पोषाहार का दिनवार भोजन तय


पौष्टिक व गुणवत्तायुक्त पोषाहार का दिनवार कार्यक्रम तय है। सोमवार व शनिवार को रोटी-सब्जी, बुधवार व शुक्रवार को रोटी-दाल, मंगलवार को चावल-दाल अथवा सब्जी, गुरुवार को खिचड़ी बच्चों को दी जाती है। सप्ताह में एक दिन फल देना भी अनिवार्य है। गेहूं व चावल स्कूलों को सरकार उपलब्ध कराती है। इसके अलावा अन्य सामान के लिए 4.48 रुपए प्राथमिक स्कूल में प्रतिदिवस प्रतिबालक तथा उच्च प्राथमिक में 6.71 रुपए दिए जाते हैं। कुक कम हैल्पर को मानदेय 1320 रुपए अलग से मिलते हैं।


माप व हाजिरी में गड़बड़ी की आशंका


प्रदेश में कईबार स्कूलों में पोषाहार में गड़बड़ी के मामले सामने आते हैं। दूध की माप व बच्चों की हाजिरी में गफलत की आशंका रहती है। उपस्थिति बच्चों की संख्या से अधिक का बजट उठा लिया जाता है। इसके अलावा गेहूं व चावल की मात्र भी निर्धारित है। प्राथमिक स्कूल में प्रति बच्चा 100 ग्राम तथा उच्च प्राथमिक में 150 ग्राम का मापदण्ड है, लेकिन इसमें ऊपर-नीचे कर लिया जाता है। इसी तरह अन्नपूर्णा दूध योजना के तहत कक्षा 1 से 5 तक 150 मिलीलीटर व 6 से 8 तक के बच्चों को 200 मिलीलीटर दूध देना होता है, लेकिन स्कूलों में इस नाप का ध्यान नहीं रखा जाता।

इनका कहना है...
मिड-डे-मील आयुक्त के पत्र पर सभी अधिकारियों को पोषाहार का निरीक्षण कर रिपोर्ट भेजने के निर्देश दिए गए हैं।
अविचल, चतुर्वेदी, जिला कलक्टर, दौसा

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