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टिड्डियों से नुकसान को देख किसान की मौत, 25 साल बाद विश्व में सबसे बड़ा टिड्डी अटैक

बाड़मेर। प्रदेश में टिड्डियों का आतंक ( Grasshoppers Attack in Rajasthan ) बढ़ता ही जा रहा है। बाड़मेर के बालोतरा में टिड्डियों ( Locust ) से फसल को नुकसान को देख किटनोद गांव के किसान भगाराम (38) की गुरुवार को हार्ट अटैक से मौत हो गई। भगाराम के 25 बीघा खेतों में खड़ी फसलों में टिड्डियों ने फसलों को खासा नुकसान पहुंचाया था। सात महीने पहले थार मरुस्थल पहुंचने के बाद टिड्डी अब तक प्रजनन के जरिए अपनी 3 पीढ़ी बना चुकी है। अरबों की संख्या पार कर गई टिड्डियों के दल खेत में खड़ी फसल चट कर रहे हैं। गत पखवाड़े में असंख्य टिड्डी ने बाड़मेर, जैसलमेर, जालोर, बीकानेर में हमला किया है।

टिड्डियों दल ने पश्चिमी राजस्थान में प्रशासन को हिलाकर रख दिया है। पाकिस्तान की सीमा से सटे राजस्थान के जिलों में तबाही मचाते हुए पाली जिले के गोड़वाड़ क्षेत्र के बाद अब रोहट उपखण्ड को निशाना बनाया है। टिड्डियों ने पाली के रोहट उपखंड के गढ़वाड़ा चाटेलाव और सज्जनगढ़ क्षेत्र में सारी फसलें चौपट कर दी है। पाली में तीसरे दिन गुरुवार को भी किसान टिड्डियों के हमले से परेशान रहे और उन्हें भगाने का प्रयास करते रहे। जिला कलक्टर दिनेशचंद्र जैन ने बताया कि टिड्डियों को भगाने के लिए प्रशासन की ओर से लगातार प्रयास जारी है। काफी हद तक इस पर काबू भी पा लिया गया है और जल्द ही इन्हें खत्म कर दिया जाएगा। वहीं जालोर में भी आतंक मचाते हुए टिड्डियों ने बड़ी मात्रा में किसानों की करोड़ों रुपए की फसल को बर्बाद कर दिया है।

बाड़मेर व फलोदी के बीच पैदा हुए टिड्डी दल टिड्डी ने नवम्बर-दिसम्बर में भारत पाकिस्तान बॉर्डर के अलावा बाड़मेर-फलोदी के मध्य, गुजरात के पालनपुर में प्रजनन किया। अब कच्छ के रण में तीसरा प्रजनन कर रही है। इनकी संख्या करोड़ों में हो गई है। वयस्क हो गई टिड्डियां सर्दी के बावजूद अब तक खत्म नहीं हो सकी है।

25 साल बाद विश्व में सबसे बड़ा टिड्डी अटैक
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य और कृषि संगठन (एफएओ) के ताजा बुलेटिन के मुताबिक सोमालिया व इथोपिया के बाद भारत की स्थिति सर्वाधिक भयावह है। एफएओ की ओर से बुलेटिन के साथ जारी नक्शे में पूरा पश्चिमी राजस्थान लाल नजर आ रहा है। यूएनओ ने इसे 25 साल बाद विश्व में सबसे बड़ा टिड्डी अटैक माना है। वैसे यह समय टिड्डी के भारत से पाकिस्तान, ईरान सहित मध्य पूर्व के देशों की ओर लौटने का समय है, लेकिन हवा की बदली दिशा और पाकिस्तान के नियंत्रण में नाकाम रहने से बड़ी संख्या में टिड्डी दल भारत में मौजूद हैं।



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