रायपुरिया गांव में खुले में बने जीएसएस को लेकर परेशानी में डिस्कॉमकर्मी
सियाणा. रायपुरिया गांव में खुले में बने जीएसएस को लेकर कार्मिक समस्या झेल रहे हैं। इसकी चारदीवारी तक नहीं है। हालांकि लंबे इंतजार के बाद चारदीवारी निर्माण कार्य शुरू हुआ था, लेकिन अचानक ही कार्य बंद कर दिया गया और चारदीवारी अधूरी ही रह गई।
ग्रामीणों ने बताया कि पहले जीएसएस पूरा खुले जंगल में होने से खतरा ही खतरा था। दिनभर पशुओं का विचरण होने से समस्या बनी हुई थी। कर्मचारी एक झोंपड़ी में रहते हुए डयूटी करते हैं। अब भी जीएसएस का कार्य संभालना व पशुओं को भगाने का कार्य ऐसे ही चल रहा ह। निर्माण कार्य शुरू होने से पशुओं के विचरण की चिंता खत्म हो ागई थी, लेकिन कार्य बंद हो जाने से मायूसी छा गई। आस-पास स्थित घना जंगल, मंडराता वन्य जीवों का खतरा, रहने को मात्र घास-फूस की कुटिया में ड्यूटी करने वाले कार्मिकों की वेदना हैं। गांवो में विद्युत सप्लाई की व्यवस्था में सुधार लाने के लिए नए जीएसएस बनाए हैं, लेकिन जीएसएस की चारदीवारी व कार्मिक के रहने को भवन सुविधा नहीं होने से परेशानी ही हैं। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में जीएसएस बनने से ग्रामीणों को तो खुशी मिली व सप्लाई में सुधार भी हुआ, लेकिन बाउंड्री नही होने से अक्सर पशु अंदर चले आते है। कार्मिक उन्हे डंडे से भगाते है ताकि कोई दुघर्टना न घटे।
घास-फूस की कुटिया में निवास
ठंड के बीच घास-फूस की कुटिया ही रैन बसेरा है इनका। न कोई खाट और न बैठने के लिए टेबल कुर्सियां। रात भी कुटियां में ही बिताते है। वहां नियुक्त कर्मचारी पुरुषोत्तम ने बताया कि खाना भी हमे कुटिया में ही बनाना पड़ता हैं।
बजट की कमी से बंद हैं...
रायपुरिया जीएसएस का कार्य शुरू करवाया था। काफी हद तक तो काम हुआ, लेकिन बजट कम पडऩे से काम बंद हैं। जल्दी ही शुरू करवा दिया जाएगा।
- हेमंत संखलेचा, एक्सइएन जालोर





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