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ऑपरेशन दागदार खाकी : जोधाराम पर कसा शिकंजा, सुबह बहाल हुआ तो शाम को फिर निलंबित

कोटा. घूसखोरी, आपराधिक गिरोहों से सांठगांठ रखने और गैगस्टर्स के बेहद करीबी रिश्ते रखने वाले दागी पुलिस निरीक्षक जोधाराम गुर्जर पर पुलिस महानिदेशक की गाज एक बार फिर गिर गई। राजस्थान पत्रिका में जोधाराम के अपराधियों से करीबी रिश्तों का खुलासा होने के बाद पुलिस महानिदेशक ने उसकी बहाली रोकने के साथ ही उदयपुर से हटाकर झुंझनू मुख्यालय से अटैच कर दिया। वहीं दूसरी ओर शिवराज गैंग की पार्टी में शामिल फायरमैन मुकेश तंवर के खिलाफ नगर विकास विभाग के आला अधिकारी अभी तक कार्रवाई करने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।

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राजस्थान पत्रिका ने 13 जनवरी को 'गैंगस्टर रणवीर के सिर पर था पुलिस अधिकारियों का हाथÓ खबर प्रकाशित कर पुलिस निरीक्षक जोधाराम गुर्जर और कोटा ग्रामीण पुलिस के साइबर सेल प्रभारी अजीत मोगा के अपराधियों से संबंधों का खुलासा किया था। इसी रोज डीआजी रवि दत्त गौड़ ने अजीत मोगा को निलंबित कर दिया। इसके साथ ही जोधाराम के संबंधों की जानकारी पुलिस मुख्यालय भेज दी।

तीन साल से निलंबित
सीआई जोधाराम कोटा ग्रामीण जिला पुलिस के मोडक थाने का एसएचओ बनाए जाने के बाद पहली बार पूरे प्रदेश भर में सुर्खियों में आया था। डोडा चूरा के सरकारी ठेकेदार का लाइसेंसी ट्रक निकालने के लिए उसने 20 लाख रुपए की रिश्वत मांगी थी। घूस की पहली किस्त के तौर पर पांच लाख रुपए लेने के लिए उसने कोटा के प्रॉपर्टी डीलर विनोद पारेता को ठेकेदार के पास भेजा था। एसीबी ने 22 अगस्त, 2014 को जोधाराम के लिए रिश्वत लेते हुए विनोद पारेता को धर दबोचा था। पारेता के गिफ्तार होते ही जोधाराम भाग निकला और एक साल से ज्यादा समय तक फरार रहा। इसी दौरान उसे जमानत भी मिल गई, लेकिन इसी बीच एसीबी ने जून 2016 में उसके खिलाफ जुर्म प्रमाणित होने की रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल कर दी। तब जाकर पुलिस मुख्यालय ने 24 अक्टूबर 2016 को उसे निलंबित किया था।

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सुबह बहाली, शाम को निलंबित
करीब 39 महीनों के निलंबन के बाद जोधाराम बहाली की कोशिशों में जुटा था। पुलिस मुख्यालय में उसकी बहाली की फाइल तैयार होकर पुलिस महानिदेशक तक जा पहुंची थी। सूत्रों के मुताबिक 13 जनवरी की सुबह जोधाराम की बहाली के आदेश जारी भी हो गए, लेकिन इसी दिन राजस्थान पत्रिका में गैंगस्टर रणवीर चौधरी से उसके सबंधों का खुलासा होने के बाद डीआईजी रवि दत्त गौड़ ने इस बाबत पूरी रिपोर्ट मुख्यालय भेज दी। जिसके चलते जोधाराम की बहाली के आदेश शाम होने तक फिर से निलंबन के आदेशों में तब्दील हो गए।

उदयपुर से हटा झुंझनू भेजा
निलंबन के दौरान जोधाराम को उदयपुर पुलिस लाइन से अटैच किया गया था, लेकिन वह अक्सर कर कोटा, चित्तौड़ और झालावाड़ में ही दिखाई देता था। निलंबन के दौरान भी अपराधियों और उनके गिरोहों के साथ जोधाराम की नजदीकियां बरकरार रहीं। इन सभी बातों से भी कोटा के आला अफसरों ने पुलिस मुख्यालय को अवगत करा दिया। जिसके बाद जोधाराम को उदयपुर से हटाकर रिजर्व पुलिस लाइन झुंझनू से अटैच कर दिया गया। पुलिस सूत्रों के मुताबिक झुंझनू के आला अधिकारियों को पुलिस मुख्यालय ने उसकी नियमित उपस्थिति का कड़ाई से सत्यापन करने के भी निर्देश दिया है।



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