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सुजानगढ़ के तीन युवा फंसे विदेश में । रोमानिया केम्प में शरणार्थी बन काट रहे है दिन। युवको के परिजनों ने विदेश मंत्री से की गुहार।

सुजानगढ़। शहर के तीन युवक विदेश में अच्छा कमाने के लिए जर्मनी गए थे, लेकिन धोखेबाजी का शिकार हुए और अजहर भाईजान नामक देश पहुंच गये और वहां से धक्के खाते-खाते सर्बिया, रोमानिया, हंगरी और फिर रोमानिया पहुंच गये। जानवरों के जैसा श्लूक इन युवकों के साथ विदेश में एजेंटों द्वारा करते हुए मोबाईल पासपोर्ट भी छीन लिये गये। सात माह से दो युवक, तीन माह से एक युवक रोमानियां के शरणार्थी कैंप में फंसे हुए हैं। 
माईनस 8 डिग्री सेल्सियस की जमा देने वाली ठंड से हाल बेहाल तीनों युवक अब भारत सरकार से व अपने परिजनों से वापस स्वदेश बुला लेने के लिए आग्रह कर रहे हैं। दूसरी ओर परिजनों की जान सांसत में आई हुई है कि उनके बच्चों को कुछ हो गया तो वो क्या करेंगे। प्रति केंडिडेट के हिसाब से 11 लाख 50 हजार रूपए लेकर विनोद पुत्र मदनलाल गहलोत निवासी प्रगति नगर ने तीनों को जर्मनी में वर्क परमिट दिलाकर करीब डेढ़ लाख रू. प्रतिमाह का काम दिलवाने के लिए भेजा था। लेकिन आज तीनों युवकों को खाने के लाले पड़ रहे हैं। 
पंकज पुत्र स्व. मूलचंद जांगिड़, उम्र 30 साल निवासी प्रगति नगर सुजानगढ़, रामेंद्र पुत्र इन्द्रचंद गहलोत, उम्र 22 साल, निवासी प्रगति नगर सुजानगढ, विकास पुत्र शंकरलाल माली, उम्र 20 साल निवासी नलिया बास सुजानगढ़ तीनों युवक रोमानिया में फंसे हुए हैं। 
तीनों युवकों के परिजन इन्द्रचंद गहलोत, शंकरलाल सैनी, नरेश जांगिड़ ने अब भारत सरकार के विदेश मंत्री को एक संयुक्त पत्र भेजकर मांग की है कि तीनों युवकों पंकज, रामेंद्र, विकास को वापस भारत मंगवाया जावे, ताकि परिजनों की जान में जान आ सके। परिजनों ने विदेश मंत्री को बताया है कि सुजानगढ़ के विनोद गहलोत नामक एजेंट द्वारा दिल्ली से फ्लाईट के जरिये तीनों युवकों को ‘‘अजहर भाईजान’’ नामक देश में भेजा गया। उसके बाद वहां पर उनको आगे दूसरे एजेंट द्वारा 1 माह तक हाॅस्टल में रखा गया। तीनों युवकों द्वारा जर्मनी भेजने की बात कहने पर सिस्टम सही नहीं होने का बहाना बनाया गया। उसके बाद तीनों युवकों पंकज, रामेंद्र, विकास को सर्बिया भेजा गया। जहां पर उनको करीब 5 महीने तक रखा गया। इस दौरान एजेंट द्वारा हमें कहा गया कि टूरिस्ट वीजा से इलीगल तरीके से रखा जा रहा है, इसलिए टाईम लगेगा और तुम लोगों ने कहीं शिकायत की तो, तुम्हारे बच्चों की जान को खतरा हो सकता है। इस दौरान जंगलों में पैदल चलना, नदी में पैदल चलना जैसे अत्याचार तो आम बात रही। 
परिजनों ने विदेश मंत्रालय को जानकारी दी है कि उसके बाद तीनों युवकों को ‘‘रोमानिया’’ नामक देश जाने पर मजबूर करते हुए तीनों के पासपोर्ट और मोबाईल छीन लिये गये और जबरन सर्बिया का बोर्डर क्रोस करवाकर रोमानिया ले जाया गया। उसके बाद तीनों को आगे से आगे ले जाया गया और हंगरी के बोर्डर पर छोड़ दिया गया। कई दिनों तक जंगलों में पैदल भटकने के बाद हंगरी देश की पुलिस द्वारा तीनों को गिरफ्तार किया गया। वहां पर एक दिन पुलिस थाने में रखा गया और फिर से रोमानिया की पुलिस को सौंप दिया गया। उसके बाद हमारे तीनों युवक अब रोमानिया पुलिस के पास शरणार्थी कैंप में हैं और वहां उनका जीना मुहाल हो रखा है। उनके द्वारा रोमानिया एंबेसी में भी काॅल किया गया, लेकिन अब तक उनके पास मदद नहीं पहुंची है। 
परिजनों का आरोप है कि एजेंट व एजेंट के लोग अब 1000 यूरो प्रति केंडिडेट के हिसाब से टिकट बनवाकर तीनों युवकों को वापस भारत बुलाने के और मांग रहे हैं। पत्र के जरिये भारत सरकार से तीनों युवको को सकुशल वापस स्वदेश लाने की मांग करते हुए 35 लाख की ठगी करने वाले एजेंट पर कानूनी कार्यवाही करने की मांग की गई है।
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