रक्तिम तिवारी/अजमेर. मौसम पर ग्लोबल वार्मिंग का असर दिखने लगा है। इस साल जून तक मौसम में लगातर कई बदलाव होंगे बेमौसम बरसात, ओलावृष्टि, अंधड़ और तापमान में असामान्य बढ़ोतरी संभव है।
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2020 की शुरुआत से चीन, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, रूस, भारत सहित कई देश कड़ाके की ठंडक, बर्फबारी से प्रभावित है। न्यूजीलैंड में 40 साल बाद समुद्र का पानी 4 से 6 डिग्री तक गर्म हो गया है। ऑस्ट्रेलिया में राजस्थान जैसे रेतीले अंधड़ प्रारंभ हो गए हैं। यह ग्लोबल वार्मिंग का असर है।
ठिठुर गया है उत्तर भारत
समूचा उत्तर भारत कड़ाके की सर्दी से ठिठुरा हुआ है। जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड में भारी बर्फबारी जारी है। राजस्थान में माउन्ट आबू, फतेहपुर, जोबनेर सहित कई इलाकों में न्यूनतम पारा माइनस डिग्री तक पहुंच गया है। अजमेर का तापमान भी 1 जनवरी को 3.4 डिग्री तक पहुंच चुका है।
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ला नीनो की गति तेज
मौसम विभाग की मानें तो ठंड का का दायरा इस बार मार्च तक रहने की उम्मीद है। जबकि सामान्य तौर पर मकर संक्रांति और बसंत पंचमी के बाद हल्की गर्मी मौसम में दस्तक दे देती है। मार्च तक प्रशांत महासागर में ला-नीनो की गति तेज रहने से मौसम में कई उथल-पुथल होंगे।
बेमौसम बारिश-ओले
पश्चिमी विक्षोभ के कारण जनवरी से जून के मध्य बेमौसम बरसात, ओलावृष्टि होने की भी संभावना है। इस दौरान कभी बर्फीली हवाएं तो तभी तापमान में उतार-चढ़ाव बना रहेगा। अप्रेल से जून तक तेज गर्मी, लू, अंधड़ के साथ-साथ तापमान में बदलाव भी देखने को मिलेगा।
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बीते साल हुई रिकॉर्ड बरसात
ग्लोबल वॉर्मिंग और इंडियन नीनो प्रभाव के चलते पिछले साल राजस्थान में जमकर बरसात हुई थी। अजमेर भी इसमें शामिल है। जिले की औसत बारिश 550 मिलीमीटर है। जबकि 1 जून से 8 सितंबर तक जिले में 900 मिलीमीटर हो चुकी थी। इससे पहले सात साल तक जिले की औसत बारिश 350 से 450 मिलीमीटर के बीच ही हुई थी।
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किसको मानें सही...
सिंचाई विभाग जयपुर रोड और मौसम विभाग रामगंज में है। दोनों विभाग बरसात रिकॉर्ड करते हैं। सिंचाई विभाग ने पिछले साल सितम्बर तक 900 और मौसम विभाग ने 800 मिलीमीटर बरसात मापी। दोनों के वर्षा मापी यंत्र अलग-अगल क्षेत्रों में है। ऐसे में कौनसे आंकड़े को सही माना जाए यह जल संसाधन और सिंचाई विभाग को तय करना है।





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