दौसा. मिनी पुष्कर कहे जाने वाले गेटोलाव में पक्षियों की चहाचहाहट अब गुम हो गई है। पंछियों से आबाद रहने वाले गेटोलाव के पवित्र सरोवर में अब सन्नाटा पसरा रहता है। प्रशासन व जनप्रतिनिधियों का गेटोलाव के विकास की ओर ध्यान नहीं है। ऐसे में देश-विदेश से आई पक्षियों की प्रजाति ने भी मुंह मोड़ लिया है।
National Bird Day: The chirping of lost birds
जिला प्रशासन की ओर से फरवरी 2017 में गेटोलाव में पक्षी मेले का आयोजन किया गया था। इसमें देश-प्रदेश के पक्षी वैज्ञानिक व पर्यावरणविद् आए थे। विदेशी पावणे भी पक्षी मेले की खूबसूरती को निहारने पहुंचे थे। उस समय गेटोलाव में करीब 135 प्रकार के देशी-विदेशी प्रजातियों के पक्षियों ने डेरा डाला हुआ था। पक्षी प्रेमी पक्षियों को निहारने व फोटो लेने दूर-दूर से आने लगे। कुछ समय सरोवर में बोटिंग भी हुई थी।
तत्कालीन विधायक शंकरलाल शर्मा ने करीब ढाई करोड़ के विकास कार्य करवाकर गेटोलाव धाम की सूरत भी बदली। सरोवर के बीच भगवान शिव की प्रतिमा बनवाई, लेकिन वॉच टावर का कार्य अधूरा रह गया। 2018 में मानूसन के रूठने से गेटोलाव धाम सूख गया तथा प्रशासन ने भी ध्यान नहीं दिया। इसके बाद किसानों ने पानी में सिंघाड़े की फसल कर दी और सरोवर का स्वरूप बिगड़ गया। सरोवर में अशांति होने से पक्षियों ने मुंह मोड़ लिया। अब ना तो नगर परिषद सफाई पर ध्यान देती है और ना ही जल संसाधन विभाग बांध पर। जिला प्रशासन ने भी मुंह मोड़ लिया है। स्वरूप बिगडऩे पर शहरवासियों ने भी अब जाना कम कर दिया है।
प्रवासी पक्षियों ने डाला था डेरा
गेटोलाव में करीब 32 प्रजातियां प्रवासी पक्षियों की आई थी। ये प्रवासी पक्षी यूरोप, चीन, मंगोलिया, साइबेरिया व मध्य एशिया से अपने शीतकालीन प्रवास के लिए सर्दियों में भारत आते हैं। प्रवासी पक्षियों में नॉर्दन शोवलर, कॉमन ग्रीन शेंक, मार्शसैंडपाइपर, येले वेगटेल, गडवाल, पिनटेल, व्हाइट वेगटेल, रफ, लिटिल स्टिंट, ब्लैक टेल्ड गॉडिवट, कॉमन टील, पोचार्ड, गे्र हेरान, रूडी शेलडक, मलार्ड आदि थे।
बर्ड सेंचुरी बनाने की चली थी बात
पक्षी मेले के बाद गेटोलाव की चर्चा देशभर में हुई। घना पक्षी विहार का दल गेटोलाव का जायजा लेने दौसा पहुंचा। विधायक व जिला अधिकारियों के साथ चर्चा कर गेटोलाव को बर्ड सेंचुरी का रूप देने की योजना भी बनाई गई, लेकिन अब गेटोलाव के विकास पर बात तक नहीं हो रही है।
टापू बनाए, काम नहीं आए
देश-प्रदेश से आए पक्षी प्रेमियों के सुझाव पर गेटोलाव सरोवर में पक्षियों के लिए टापू बनाए गए। सरोवर की बीच में खुदाई कराई गई। वनस्पतियों के पेड़-पौधे लगाए गए। बांध की पक्की दीवार व पार्क का निर्माण कराया, लेकिन अब सरोवर का स्वरूप बिगडऩे से सुन्दरता दिन-प्रतिदिन बिगड़ती जा रही है।
National Bird Day: The chirping of lost birds







No comments:
Post a Comment