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3 साल में 34 किसानों की खेतों में जा चुकी है जान

दौसा. प्रशासनिक सुख-सुविधाओं पर सरकार करोड़ों रुपए पानी की तरह बहाती है, लेकिन किसान हितों पर अधिक ध्यान नहीं दे रही। दिन-रात खेतों में काम कर किसान अन्न पैदा करता है, लेकिन उनको न तो फसल का उचित दाम मिलता है और ना ही समय पर सरकारी सहायता मिल पाती है।
जिले में पिछले तीन वर्ष में 34 किसानों की खेतों पर काम करते वक्त मौत हो चुकी है, जबकि 22 किसानों के अंग-भंग हो चुके हैंं। हालांकि इन किसानों को सरकार कृषि विपणन बोर्ड के माध्यम से कृषि मण्डियों से मुआवजा देती है, लेकिन यह मुआवजा बहुत कम है।
कृषि विपणन विभाग ने किसानों को दो लाख रुपए मुआवजा भी तीन साल पहले से ही देना शुरू किया, अन्यथा पहले तो आश्रितों को किसान की मौत होने के बाद मात्र 1 लाख रुपए ही मुआवजा दिया जा रहा था। इस राशि में किसान के परिवार का पालन पोषण मुश्किल हो सकता है। कृषि विपणन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार किसान की मौत होने पर उसके आश्रितों को 2 लाख रुपए मुआवजा दिया जाता है। दो अंग-भंग (दोनों हाथ या पांव, दोनों आंख या फिर दो कोई से भी अंग कटने पर ) पर 50 हजार, रीढ़ की हड्डी टूटने, सिर पर चोट से कोमा में जाने पर भी 50 हजार, पुरुष या महिला के सिर के बालों की डी-स्पेकिंग होने पर 40 हजार, छोटे स्तर पर डी-स्पेकिंग होने पर 25 हजार, एक अंग जैसे एक हाथ, एक पैर, एक आंख, हाथ का पंजा आदि अंगभंग होने पर 25 हजार, चार अंगुलियां कटने पर 20 हजार, तीन पर 15 हजार व दो अंगुली कटने पर 10 हजार रुपए का मुआवजा दिया जाता है। इसी प्रकार मण्डी परिसर में कार्यरत पल्लेदार, मजदूर को फै्रक्चर होने पर मात्र 5 हजार रुपए का मुआवजा दिया जाता है।

नहीं थम रहा मौतों का सिलसिला
जिलेभर में वर्ष 2017-18 में 13 किसानों की मौत हो गई और 14 किसान घायल हो गए। इसी प्रकार वर्ष 2018-19 में 14 किसानों की मौत और 6 घायल हो गए। 2019-20 अप्रेल से जुलाई तक 7 किसानों की मौत हो गई और 2 घायल हो गए। यह आंकड़ा तो उन किसानों का है कि जिनकी फाइल कृषि मण्डी में आने से मुआवजा दिया जा चुका है। कई किसान ऐसे हैं जिनकी खेती का कार्य करते वक्त मौत हो जाती है, लेकिन समय पर अस्पतालों में पोस्टमार्टम नहीं होने से वे राजीव गांधी कृषक साथी योजना में आवेदन नहीं कर पाते हैं। वे मुआवजे से वंचित रह जाते हैं।

सर्द रात में पानी भराने को मजबूर
किसान वर्ग हर वर्ष दिन के समय बिजली सप्लाई की मांग करता है, लेकिन विद्युत निगम अधिकांश रात के समय ही बिजली सप्लाई करता है। आम लोग घरों में रजाइयों में दुबके रहते हैं, जबकि किसान ठिठुरती रात में खेतों में पानी भराने में व्यस्त रहता है। रात के समय खेतों में जहरीले कीड़े काल बन कर मण्डराते रहते हैं तो कहीं पर करंट से मौत हो जाती है।

फैक्ट फाइल
वर्ष मौत अंगभंग
2017-18 13 14
2018-19 14 6
2019-20 7 2
कुल 34 22



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