फतेहपुर/ सीकर।
दिल्ली हिंसा में मारे गए हेड कांस्टेबल रतन लाल का पार्थिव देह उनके पैतृक गाँव तिहावली लाया जाएगा जहां उनका अंतिम संस्कार होगा। इस बीच रतन लाल को शहीद का दर्जा दिए जाने की मांग उठने लगी है। इसी मांग को लेकर सीकर फतेहपुर के सदिनसर गांव के ग्रामीणों ने नेशनल हाईवे को जाम कर दिया। ग्रामीणों ने नेशनल हाईवे संख्या 11 को पूरी तरह से जाम कर दिया।
जानकारी के अनुसार बड़ी संख्या में ग्रामीण सदिनसर गांव में एकजुट हुए और रतनलाल को शहीद का दर्ज़ा देने की मांग की। हाईवे जाम होने के बाद इस मार्ग पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित है। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर ग्रामीणों से समझाईश शुरू की है।
इधर, रतनलाल का पार्थिव देह मंडावा पहुंचा गया है। पार्थिव देह को मंडावा थाने में रखा गया है। कुछ देर बाद पार्थिव देह को गांव तिहावली लाया जाएगा। फतेहपुर विधायक हाकम अली ने रतनलाल पर प्रतिक्रिया करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री से बात कर शहीद का दर्जा देने की मांग की है। गौरतलब है कि दिल्ली हिंसा में सीकर के फतेहपुर में गांव तिहावली निवासी हैड कांस्टेबल रतनलाल मारे गए थे।
गांववालों ने रतनलाल को शहीद का दर्जा देने की मांग की है। फतेहपुर विधायक हाकम अली ने भी विधानसभा में यही मांग उठाई। रतनलाल को शहीद का दर्जा देने की मांग को लेकर नाराज ग्रामीणों ने रास्ता जाम कर दिया। जिससे नेशनल हाइवे संख्या 11 पूरी तरह जाम हो गया। ग्रामीण सदिनसर गांव के पास डेरा जमाए बैठे हैं। ग्रामीण शव लेने से इंकार कर रहे हैं और अभी तक शव नहीं लिया है।
शहीद का दर्जा मिले
सैकड़ों की भीड़ फिर भी दूर तक फैला सन्नाटा। लोगों की गर्व से भरी नम आंखें। दिल्ली हिंसा में मारे गए हैड कांस्टेबल रतनलाल के गांव तिहावली में मंगलवार को लोग पार्थिव देह का इंतजार करते रहे। बुधवार को उनका अंतिम संस्कार होगा। घर पर मां व परिवार की अन्य महिलाओं को रतनलाल की मौत की सूचना नहीं दी गई।
उधर, पोस्टमार्टम के बाद रतनलाल की पार्थिव देह उनके दिल्ली स्थित घर पर लाई गई। परिवार में कोहराम मच गया। पत्नी पूनम बेहोश हो गई और बच्चे बिलख पड़े। दोनों बेटी व बेटे का भी रो-रोकर बुरा हाल था। बेटा बार बार पापा के बारे में पूछता रहा।
घटनास्थल पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, रतनलाल उपद्रवियों के बीच चारों तरफ से घिर गए थे। बाद में जब पुलिस ने उपद्रवियों को तितर-बितर किया तब रतनलाल बुरी तरह से घायल सड़क पर पड़े हुए थे। दिल्ली पुलिस के साथी जवानों ने रतन लाल को गंभीर घायल अवस्था में तुरंत अस्पताल पहुँचाया, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। डॉक्टर्स ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
जानकारी ये भी सामने आई कि रतनलाल ड्यूटी के प्रति बेहद कर्मठ थे। सूत्रों के मुताबिक़ सोमवार को जब हिंसा हुई उस वक्त रतनलाल को बुखार था। लेकिन हेड कांस्टेबल अपने स्वास्थ्य की फिक्र किए बगैर ड्यूटी की। वहीं परिवार को टीवी पर खबर देखने के बाद उनकी मौत की जानकारी मिली। उनके परिवार में पत्नी पूनम, एक बारह साल की बेटी, एक दस साल की बेटी और सात साल का बेटा है।





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