Breaking News
recent

राजस्थानी भाषा के संवर्धन में सहायक सिद्ध होंगे ग्राम लोक‘‘-मधु आचार्य ‘आशावादी

बीदासर । साहित्य अकादेमी, नई दिल्ली और मरूदेश संस्थान सुजानगढ़ के संयुक्त तत्वावधान में सोमवार को सुबह राजकीय लक्ष्मी नारायण तापड़िया उच्च माध्यमिक विद्यालय सांडवा में आयोजित साहित्यिक उत्सव ‘ग्राम लोक’ के मुख्य अतिथि साहित्य अकादेमी की राजस्थानी भाषा परामर्श मंडल के संयोजक मधु आचार्य ‘आशावादी‘ ने कहा कि साहित्य  अकादेमी द्वारा देश भर में गाँव -गाँव तक साहित्य पहुंचाने के लिए ग्राम लोक कार्यक्रम शुरू किया गया है। जिसमें चैबीस भारतीय भाषाओं के कवि अपनी रचनाएं सुनाकर साहित्यिक वातावरण तैयार करते हैं। उन्होंने कहा कि जिस स्तर का आयोजन सांडवा ग्राम में हुआ है, वैसा देश में अभी तक कहीं नहीं हुआ है। ग्राम लोक कार्यक्रम हमारी तरफ से ज्यादा सफल हो रहे हैं, जो राजस्थानी भाषा के संवर्धन में सहायक सिद्ध होंगे। मधु अचार्य आशावादी ने आगामी 21 फरवरी को विश्व मातृभाषा दिवस विद्यालय में मनाने का आह्वान किया। महाकवि कन्हैयालाल सेठिया जन्म शताब्दी वर्ष पर श्रृंखलाबद्ध रूप से आयोजित इस ग्राम लोक कार्यक्रम की अध्यक्षता प्राचार्य हेमाराम मेघवाल ने की। सांडवा के ठाकुर गुमान सिंह के सानिध्य में आयोजित ग्राम लोक में वरिष्ठ साहित्यकार अकादमी के सदस्य भंवर सिंह सामौर ने ग्राम लोक आयोजन की पृष्ठभूमि को रेखांकित करते हुए सांडवा ग्राम के ऐतिहासिक परिपेक्ष्य पर अपने विचार व्यक्त किए। आयोजन के विशिष्ट अतिथि साहित्यकार हरीश बी शर्मा ने ‘‘तपे तावड़ो भोम पर, जावणो जरूरी है, जीवा जितै भायेड़ा, सीवणो जरूरी है..कविता सुनाकर ग्राम लोग आयोजन को एक सार्थक पहल बताया।
एडवोकेट अशोक प्रजापत ने मातृभाषा की संवैधानिक मान्यता को जनता का अधिकार बताया। आयोजन में विद्यालय के व्याख्याता भवानी शंकर मारू, सरपंच संजय कुमार मेघवाल, उपसरपंच शिव शंकर पारीक, राजकुमार नाई, लालचंद सोनी, ब्लॉक मेंबर सुमन मेघवाल आदि ने विचार व्यक्त किए। मरूदेश संस्थान के अध्यक्ष डॉ. घनश्याम नाथ कच्छावा ने आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्जवलन से हुआ। विद्यालय की छात्राओं के द्वारा स्वागत गीत प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का सफल संचालन व्याख्याता पवन कुमार नाई ने किया।
इन्होंने किया काव्य पाठ:-
ग्राम लोक कार्यक्रम में वरिष्ठ रचनाकार बजरंगलाल जेठू ने अपनी रचना ‘हुकुम हुए तो पेड्यां पग धरूं, हीय माता आई थारै देवण नै धोक’ के माध्यम से सरस्वती वंदना प्रस्तुत की। कवि अजीत सिंह चारण ने अपने गीत ‘मिनखा में मिनख घणेरा है, पण मिनखपणै रा टोटा है.. से दाद पाई। गजलकार प्रकाश जांगिड़ कीरचना -फांफां मत फेंक-झूठा ढ़ाण रेण दे, बची कुची थोड़ी सी पिछाण रैण देकृको करतल ध्वनि से सराहना मिली। राजस्थानी कवि मनोज कुमार चारण ने फागण पर केंद्रित अपनी रचना ‘‘सांवळी सी नार बार गजब कर गी, गुवाड़ बै्या बुढ़िया को मन हरगी.. सुनाकर आनंदित किया। रचनाकार यासिन खां और शोधार्थी पीतांबरी वर्मा ने भी काव्य पाठ किया। अंत में विद्यालय को साहित्य एवं कन्हैयालाल सेठिया का चित्र भेंट किया गया।
इन्होंने किया स्वागत-
अतिथियों व कवियों का साफा पहनाकर व प्रतीक चिह्न प्रदान कर व पुष्पाहार से स्वागत संस्था के सचिव कमलनयन तोषनीवाल, संयोजक किशोर सैन, रामकुमार माली, सुरेद्र भंसाली, नरपत गोदारा, बंशीलाल देराश्री, प्यारेलाल सुणिया, हरीप्रसाद जोशी, शिवकुमार शर्मा, रेणु, रेखा कुलदीप, सुनीता, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता मैना देवी, ओम प्रकाश पुरोहित श्यामसुंदर सोनी आदि ने किया। विद्यालय के प्रधानाचार्य हेमाराम मेघवाल ने अध्यक्षीय उद्बोधन में ऐसे आयोजनों को साहित्य के प्रति सामाजिक सरोकार बताया।
Anonymous

Anonymous

No comments:

Post a Comment

Powered by Blogger.