जयपुर. राज्य के करीब 13 लाख किसानों को बिजली बिल में दी जा रही डायरेक्ट विद्युत सब्सिडी पर रोक और विद्युत दरों में बढ़ोतरी का मामला सोमवार को सदन में गूंजा। उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ ने स्थगत प्रस्ताव के जरिए यह मामला उठाते हुए कहा कि पिछली सरकार ने किसानों को 833 रुपए प्रति माह डीबीटी देने का फैसला किया था। इस पर रोक लगा कर सरकार ने किसानों के साथ अन्याय किया है।
पत्रिका ने रविवार के अंक में इसका समाचार प्रकाशित किया था। समाचार का हवाला देते हुए राठौड़ ने कहा कि बिजली मंत्री कहते हैं कि उन्हें जानकारी ही नहीं है। पिछली सरकार ने 1 नवम्बर 2018 को यह फैसला किया था। अब सब्सिड़ी रोके जाने से प्रदेश के 12.96 लाख किसान सरकार को कोस रहे हैं। ये किसान कनेक्शन विच्छेद की परिधि में आ गए हैं। सरकार पिछली सरकार की ओर से किसानों को दी गई 1150 करोड़ रुपए की रियायत उनकी जेब से वापस लेने का काम कर रही है। सरकार ने अडाणी टैक्स, फ्यूल चार्ज, फिक्स चार्ज के नाम पर बिजली दरें बढ़ा दींं। राजस्थान की जनता सरकार को माफ नहीं करेगी।





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