पाली। पाली के मेडिकल कॉलेज [ Medical college Pali ] में श्वास रोग [ Respiratory disease ] पर राज्य स्तरीय कॉन्फ्रेंस [ State level conference ] 22 व 23 फरवरी को आयोजित की जा रही है। चिकित्सकों की माने तो जिला स्तर पर मेडिकल व फिजिशियन की कॉन्फ्रेंस तो हो चुकी जैसलमेर व नाथद्वारा के साथ अन्य जिलों में हो चुकी है, लेकिन श्वास रोग पर पहली बार जिला स्तर पर श्वास रोग को लेकर कॉन्फ्रेंस हो रही है। इस कॉन्फ्रेंस में पाली जिले के मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल केके अग्रवाल थॉरेकोस्कॉपी, ब्रान्कोस्कॉपी जांच पर जोधपुर में रहते हुए कार्य किया है। उनके साथ राष्ट्रीय स्तर के शिक्षक शोध पत्र पेश करेंगे। जिनके अनुभव से लाभ लेकर पाली के साथ अन्य जगहों से आए रेजिडेंट व चिकित्सक चिकित्सा में उन अनुभवों का उपयोग कर सकेंगे।
इन बीमारियों पर होगा व्याख्यान
इस कॉन्फ्रेंस में श्वास रोग से जुड़े हर रोग पर शोध पत्र पेश करने के साथ व्याख्यान के सत्र होंगे। इनमें प्रमुख रूप से दमा, फेफड़ों का कैंसर, एलर्जी, निमोनिया, टीबी, सिलकोसिस, फेफड़े में पानी भरना आदि बीमारियां मुख्य है। जिन के उपचार की नई तकनीक और रिसर्च की जानकारी दी जाएगी।
मुख्य रूप से ये चिकित्सक पेश करेंगे शोध
इस कॉन्फ्रेंस में लखनऊ मेडिकल कॉलेज के विभागध्यक्ष व नेशनल कॉलेज ऑफ चेस्ट फिजिशियन के अध्यक्ष डॉ. सूर्यकांत त्रिपाठी, अहमदाबाद मेडिकल कॉलेज श्वास रोग विभागाध्यक्ष डॉ. आरएम सोलंकी व डॉ. विनोद गर्ग प्रांतीय शय रोग अधिकारी भी भाग लेंगे। इसके साथ ही 400 विशेषज्ञ अपने अनुभवों को साझा करेंगे। इंडियन चेस्ट सोसायटी के कोषाध्यक्ष वाराणसी के जेके सामरिया भी इसमें भाग लेंगे। ये चिकित्सक यूरोप के साथ अन्य देशों में भी बीमारियों पर किए शोध पर व्याख्यान दे चुके हैं। पाली मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल अग्रवाल भी यूरोप के वियना में श्वास रोग की कार्यशाला में भाग ले चुके है।
पाली में रोजाना सामने आ रहे टीबी के मरीज
पाली का नाम प्रदूषित शहरों की श्रेणी में आता है। यहां के बांगड़ अस्पताल की ओपीडी रोजाना 100-125 तक मरीज श्वास रोग के आते हैं। इनमें से 25-30 रोगी तो टीबी से पीडि़त होते है। इसके अलावा अस्थमा, सीओपीडी के साथ अन्य श्वास रोगों के मरीज आते है। जिनका उपचार इस कॉन्फ्रेंस के बाद नई तकनीक से किया जा सकेगा।





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