जयपुर. पुलिस मुख्यालय से अधिकारी भले ही कोई भी आदेश दे दे, थाने पर तो चलेगी थानेदार की ही। तुरंत एफआइआर दर्ज करने के आदेश की पालना थानों पर नहीं हो रही है। ऐसा ही एक मामला करधनी थाने में सामने आया है। एक व्यक्ति साढ़े 10 लाख रुपए की ठगी का शिकार हो गया और पुलिस ने परिवाद लेकर रख लिया। परिवादी उससे भी संतुष्ट था कि पुलिस जांच तो करेंगी। लेकिन 15 दिन तक जांच तो दूर की बात बयान भी नहीं लिए गए। तब जाकर के परिवादी सुशांत सिटी कालवाड़ रोड निवासी अजीत सिंह ने थाने पर नाराजगी जताई तो 11 फरवरी को एफआइआर दर्ज की गई।
पेशे से एडवोकेट अजीत सिंह ने बताया कि उसके परिचित बडौदा निवासी रामसिंह राजपूत की बेटी की शादी 16 फरवरी को होनी है। दुल्हन के लिए गहने बनाने की जिम्मेदारी उन्होंने मुझपर छोड़ी थी। ऐसे में परिचित मीना कंवर के माध्यम से रावण गेट चौराहा स्थित कृष्ण कुमार सोनी की दुकान पर गए। वहां पर सभी ने मिलकर के गहनों की डिजाइन पसंद की और 50 हजार रुपए का अग्रीम भुगतान कर दिया। सोनी ने बताया कि गहनों की कुल कीमत करीब 12 लाख रुपए आएगी ओर 24 जनवरी तक बन जाएंगे। इस बीच सोनी के बताए अनुसार बैंक खातों में दो बार में 10 लाख रुपए दे दिए। रुपए प्राप्त होने की उसने फोन पर हामी भी भर दी। 23 और 24 जनवरी को उसकी दुकान पर गए तो ताला लगा मिला। उसके किराए के घर पर भी देखा तो वहां भी पता चला कि वह परिवार सहित चला गया। आरोपी कृष्ण कुमार सोनी मूलत: हरियाणा का रहने वाला है। उसके मोबाइल नंबर भी बंद आ रहे हैं।
धोखाधड़ी का पता चलने पर 25 जनवरी को ही थाने पर लिखित रिपोर्ट दी गई, लेकिन उसपर महज परिवाद दर्ज किया गया। बार-बार थाने पर संपर्क किया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। परिवादी ने बताया कि थाने पर जाकर के फिर से फरियाद की तो रिपोर्ट दर्ज की गई। अब जांच अधिकारी हैड कांस्टेबल राजेन्द्र सिंह ने बताया कि जांच जारी है, परिवादी के जल्द ही बयान लिए जाएंगे।





No comments:
Post a Comment