बुरहानपुर. नगर पालिका परिषद में जनप्रतिनिधियों ने 6 दिनों से जारी धरना मंगलवार शाम समाप्त हो गया। मामले में कलेक्टर राजेश कौल ने एसडीएम विशा माधवानी को जांच अधिकारी नियुक्त किया है, उन्होंने 24 घंटे में मामले की जांच कर प्रतिवेदन मांगा है। इसके आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। कार्रवाई संबंधित जानकारी मिलने के बाद शाम 7.30 बजे धरना समाप्त किया। जनप्रतिनिधियों ने कहा कि लंबे समय से विरोध करने के बाद आखिरकार हमारी मांगों पर सुनवाई हो रही है।
बता दें कि परिषद में 5 फरवरी से कांग्रेस और बीजेपी के पार्षद संयुक्त रूप से सीमएओ कीर्ति चौहान की कार्यशैली के विरोध में धरना दे रहे थे। मामले में कलेक्टर कौल ने मंगलवार शाम आदेश जारी किए। जांच की रिपोर्ट तीन दिनों में मांगी गई है। बता दें कि 7 फरवरी को नपाध्यक्ष राजेश चौहान एवं नेता प्रतिपक्ष गेंदालाल मोर्य ने सीएमओ कीर्ति चौहान पर अनियमित्ता के आरोप लगाए थे। परिषद की बदहाल व्यवस्था को देखते हुए सभी जनप्रतिनिधि कार्यालय के बाहर धरना दे रहे थे। मामले में उन्होंने दो दिनों तक कार्यालय पर ताला लगाए रखा। एसडीएम माधवानी के हस्तक्षेप के बाद उन्होंने कार्यालय का गेट खोला।
अब तक यह हुआ
इससे पहले नगर पालिका के भाजपा, कांग्रेसी पार्षदों ने सीएमओ के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित किया था। नपा अध्यक्ष ने पार्षदों के साथ मिलकर एसडीएम को ज्ञापन सौंपा था। तब कलेक्टर राजेश कुमार कौल ने सीएमओ को कारण बताओ नोटिस जारी किया था।
सीएमओ द्वारा विकास कार्य नहीं किए जाने के विरोध में पिछले दिनों नपा के साधारण सम्मेलन में जमकर हंगामा हुआ था। रात करीब नौ बजे तक एसडीएम की मौजूदगी में आरोप-प्रत्यारोप चले थे।
सीएमओ सिर्फ आश्वासन देती रहती हैं काम नहीं करती
नपाध्यक्ष चौहान ने कहा कि महिला कर्मचारी के निलंबन मामले में सीएमओ ने लापरवाही बरती। वह सिर्फ आश्वासन देती रहीं। मामले में एक सप्ताह से अधिक समय मुझे भी झूठ बोला। जब परिषद ने प्रस्ताव पािरत कर लिया था तो निलंबन बहाली क्यों नहीं की गई।
आदेश पत्र आज ही मिला है। मामले में जांच के बाद अधिकारियों को प्रतिवेदन दिया जाएगा।
- विशा माधवानी, एसडीएम





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