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बीकानेर थिएटर फेस्टिवल 2020- नाटकों में कौमी एकता का संदेश व भ्रष्टाचार हुआ उजागर

बीकानेर. बीकानेर थिएटर फेस्टिवल के दूसरे दिन गुरुवार को पांच नाटकों का मंचन किया गया। नाटकों में कलाकारों की ओर से वर्तमान परिपेक्ष्य पर कटाक्ष के साथ कौमी एकता का भी संदेश दिया। इस दौरान देशभर के विभिन्न राज्यों से आए कलाकार अपने-अपने राज्य की संस्कृति से रूबरू करवा रहे है। इसके लिए इन नाटकों के माध्यम से समाजहित में कई तरह के संदेश दे रहे है।

पांच नाटकों के मंचन में कलाकारों ने दिखाई प्रतिभा
सुबह ११.४५ बजे आर्शीवाद भवन में चित्तौडग़ढ़ के नाटक तुर्रा कलंगी का नारायण शर्मा के निर्देशन में मंचन हुआ। इसमें तुर्रा और कलंगी के माध्यम से कौमीएकता का संदेश दिया गया। इस नाटक में एक दल संसार में पुरूष का प्रतीक तुर्रा अथवा शिव को व वहीं दूसरा दल कलंगी जो स्त्री का प्रतीक शक्ति है।

दोपहर २.३० बजे रेलवे ऑडिटोरियम में जयपुर के नाटक भंवर्या कालेट के सिकन्दर खान के निर्देशन में मंचन हुआ। नाटक में राजस्थान में रहने वाली मिरासी जाति पर आधारित इस नाटक में मगर समाज की ओर से नजर अंदाज किया जाने लगा है।


शाम ४.३० बजे टाउन हॉल में बीकानेर के नाटक लहरों के राजहंस का अशोक जोशी के निर्देशन में मंचन हुआ। अश्वघोष के संस्कृत काव्य सौन्दरनन्द से लिए गए कथावस्तु पर आधारित नाटक में पति व पत्नी के बीच कई तरह का संवाद हुआ।

शाम ६ बजे रविन्द्र रंगमंच में बरेली के नाटक चैनपुर की दास्तान का हेमासिंह के निर्देशन में मंचन हुआ। नाटक में छोटा सा गांव चैनपुर जहां हर कोई भ्रष्टाचार में लिप्त है। एक दिन मुखिया के हाथ चिट्ठी लगती है जिससे पता चलता है कि सरकारी जासूस उनके बीच छोड़ा हुआ है। इसी बीच गांव में दो लोग आते है जिनको गांव के लोग जासूस समझकर खूब आवभगत करते है। इस दौरान विचित्र हास्य स्थिति पैदा हो जाती है और असली जासूस आता है। इस दौरान भ्रष्टाचार भी उजागर होता है।

रात ८ बजे टीएम ऑडिटोरियम में मुंबई के नाटक शांकुतलम का रूपेश टिल्लू के निर्देशन में मंचन हुआ। कालिदास के क्लासिक अभिज्ञान शांकुतलम पर आधारित इस नाटक में संवादात्मक, शारीरिक कॉमेडी, माइम और क्लाउन एक्टिंग से दर्शकों को खूब गुदगुदाया है। सभी तरह के कॉन्सेप्ट से दर्शकों हर थोड़ी में ताली बजाते रहे।

आज इन नाटकों का होगा मंचन
सुबह ११.४५ बजे हंसा गेस्ट हाउस में थैंक यू दादाजी, दोपहर २.३० बजे रेलवे ऑडिटोरियम में उरूभंगम, दोपहर ४.३० बजे टाउन हॉल में अल्फाज ए इस्मत, शाम ६ बजे रविन्द्र रंगमंच में थ्रस्टि क्रो रिटन्र्स, रात ८ बजे टीएम ऑडिटोरियम में आखिरी खेल व मैडबेथ के नाटकों का मंचन होगा।



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