रक्तिम तिवारी/अजमेर.
संभाग के तीनों सरकारी लॉ कॉलेज को महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय की स्थाई मान्यता मिल सकती है। दरअसल विश्वविद्यालय की एकेडेमिक कौंसिल ने नियमों-शर्तों में रियायत दी है। इसके चलते ही कॉलेज को हर साल सम्बद्धता-मान्यता लेने की परेशानी से छुटकारा मिलेगा।
अजमेर, नागौर, भीलवाड़ा में सरकारी कॉलेज संचालित हैं। कॉलेज में सीमित संसाधन और शिक्षकों को कमी के कारण बार कौंसिल ऑफ इंडिया हर साल अंडर टेकिंग मांगता है। इससे तीनों कॉलेज में प्रथम वर्ष के प्रवेश में तीन से छह महीने की देरी होती है। साथ ही इन्हें प्रतिवर्ष महर्षि दयानंद सरस्वती विश्वविद्यालय से सम्बद्धता और मान्यता लेनी पड़ती है।
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ये है एकेडेमिक कौंसिल का निर्णय
विश्वविद्यालय की एकेडेमिक कौंसिल ने पांच साल से अस्थाई मान्यता प्राप्त सरकारी/निजी कॉलेज को नियमानुसार स्थाई मान्यता देने का निर्णय लिया है। अजमेर, भीलवाड़ा और नागौर के सरकारी लॉ कॉलेज को इससे सर्वाधिक फायदा होगा। तीनों कॉलेज 15 साल से स्थाई मान्यता को लेकर परेशान हैं। सरकार को भी हर साल बीसीआई को अंडर टेकिंग देनी पड़ती है।
हो सकेगा यूजीसी में पंजीयन
नियमानुसार देश के सभी कॉलेज और यूनिवर्सिटी का यूजीसी में 2 एफ एवं 12 बी नियम के तहत पंजीकरण जरूरी है। इसमें पंजीकरण होने पर संस्थाओं को यूजीसी के विकास योजनाओं, शैक्षिक उन्नयन-शोध कार्यक्रमों के लिए बजट मिलता है। मौजूदा वक्त तीनों लॉ कॉलेज इस नियम में पंजीकृत नहीं हैं। यह पंजीयन विश्वविद्यालय की स्थाई मान्यता के बाद ही संभव हो सकता है।
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शिक्षकों की कमी यथावत
अजमेर और भीलवाड़ा के लॉ कॉलेज में 9-9 शिक्षक कार्यरत हैं। अजमेर कॉलेज के एक शिक्षक डेप्युटेशन पर जयपुर तैनात हैं। नागौर में शिक्षकों की संख्या कम है। किसी कॉलेज में शारीरिक शिक्षक, खेल मैदान, सभागार और अन्य सुविधाएं नहीं हैं।





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