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पानी की एक एक बूंद कीमती, घट रहे भूजल भंडार बारिश के बाद भी नहीं सुधर रहे हालात


खुशालसिंह भाटी


जालोर. शुद्ध प्राण वायु, पर्यावरण और पानी मानव जीवन के आधार है। इन सभी जरुरतों में पेयजल को महत्वपूर्ण आधार माना गया है। मानव जाति की महत्वपूर्ण जरुरत में से एक पेयजल को माना गया है। अधिकतर स्थानों पर भूजल भंडार पर ही निर्भरता अधिक है। जालोर जिले की बात करें तो बहुत बड़ा क्षेत्र पेयजल और कृषि के लिए भूजल पर ही निर्भर करता है। इधर, वर्तमान हालातों पर गौर करें तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आएंगे। विभागीय अधिकारियों की मानें तो भूजल भंडारों की उपलब्धता के मुकाबले करीब 200 प्रतिशत तक दोहन हो रहा है। सीधे तौर पर भूजल भंडार रीत रहे हैं और उसके मुकाबले वे रीचार्ज नहीं हो पा रहे। क्योंकि बारिश नियमित तौर पर अच्छी नहीं हो रही। जालोर जिले की बात करें तो हालात इतने विकट हैं कि हर साल औसतन 1.50 मीटर तक भूजल भंडार में कमी आती जा रही है और भविष्य में इस तरफ हम सजग नहीं हुए तो वह दिन दूर नहीं जब भूजल भंडार पूरी तरह से समाप्त हो जाएंगे।
यों समझें हालातों को
पिछले दो साल की बात करें तो वर्ष 2018 में बारिश औसम से कम ही हुई। जिसके कारण बारिश के बाद भी जिले में 1.45 मीटर भूजल स्तर की गिरावट आई। बारिश से पहले जहां जिले में औसत भूजल भंडार 28.01 मीटर पर थे। वहीं बारिश के बाद 29.45 मीटर गहराई तक जा पहुंचे। जिले में सर्वाधिक बदतर हालात सायला ब्लॉक की थी, जहां बारिश के बाद 61.65 मीटर की गहराई तक पानी जा पहुंचा।
बारिश के बाद बढ़ा जलस्तर, लेकिन 2018 तक नहीं पहुंचा
वर्ष 2018 में औसत से कम बारिश हुई, लेकिन वर्ष 2019 में मानसून सीजन में अच्छी बारिश हुई और भूजल भंडार में 1.22 मीटर तक सुधार हुआ। लेकिन महत्वपूर्ण तथ्य यह रहा कि वर्ष 2019 में बारिश से पहले जहां जल स्तर 31.59 मीटर पर था और बारिश के बाद सुधर कर 30.37 मीटर पर पहुंच गया। लेकिन सुधार के बाद भी जिले में वे हालात नहीं बन पाए तो 2018 में बारिश के बाद थे। 2018 में बारिश के बाद औसत भूजल स्तर 29.45 मीटर गहराई पर था।
पूर्वज समझते थे, युवा नहीं समझ रहे
बरसाती पानी का बड़ा महत्व है। जालोर जिले में सांचौर, चितलवाना समेत नेहड़ क्षेत्र के अनेक गावों में ग्रामीणों के घरेां और खेतों में कुंड बने हुए हैं, जिसमें ग्रामीण बरसाती पानी को सहेजते थे। इस पानी का उपयोग सालभर पेयजल के रूप में करते थे, लेकिन नई पीढ़ी इस महत्व को अभी पूरी तरह से नहीं समझ पाई है। गिरते भूजल स्तर में हम सभी की जिम्मेदारी है कि अधिक से अधिक बरसाती पानी को सहेंजे और उपलब्ध पानी का मितव्ययता से उपयोग करें।
वर्ष 2018 में बारिश से पहले और बाद के हालात
ब्लॉक पहले बाद गिरावट
आहोर 16.86 18.26 1.40
भीनमाल 39.96 41.06 1.10
चितलवाना 10.10 10.52 0.42
जालोर 26.14 27.91 1.77
जसवंतपुरा 20.30 22.70 2.40
रानीवाड़ा 16.93 18.75 1.82
सांचौर 34.69 34.79 0.10
सायला 59.08 61.65 2.57
औसत 28.01 29.45 1.45
(वर्ष 2018 में बारिश कम हुई, भूजल स्तर में बारिश के बाद गिरावट मीटर में)
वर्ष 2019 में बारिश से पहले और बाद के हालात
ब्लॉक पहले बाद सुधार
आहोर 20.97 19.32 1.65
भीनमाल 43.93 43.34 0.59
चितलवाना 11.11 11.17 0.06
जालोर 30.49 29.13 1.36
जसवंतपुरा 26.85 24.03 2.82
रानीवाड़ा 21.73 19.49 2.24
सांचौर 31.44 30.37 1.07
सायला 66.19 66.12 0.07
औसत 31.59 30.37 1.22
(वर्ष 2019 में बारिश अच्छी हुई, लेकिन उसके बाद भी भूजल स्तर वर्ष 2018 की स्थिति में नहीं पहुंचा)
एक्सपर्ट व्यू
भूजल का अंधाधुंध दोहन के चलते भूजल भंडार कम होते जा रहे हैं। इधर बारिश भी अनियमित और कम होती है, इसलिए भूजल भंडार रीचार्ज भी नहीं हो पा रहे हैं। इन हालातों के बीच आमजन की जिम्मेदारी है कि अधिक से अधिक बरसाती पानी को सहेजा जाए। वहीं जालोर जिले के हालातों को देखते हुए यह जरुरी है कि जवाई बांध का पुनर्भरण होने के साथ नदी में नियमित रूप से निर्धारित रूप से पानी छोड़ा जाए ताकि इसके पास पास के क्षेत्रों पानी का स्तर बढ़ सके। वरना भविष्य में हालात और भी ज्यादा विकट होते चले जाएंगे।
- गणपत राणा, भूजल वैज्ञानिक, जालोर



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