अजमेर. कानों की सुनने के साथ ही शरीर का संतुलन बनाए रखने में भी अहम भूमिका होती है। ऐसे में ध्वनि प्रदूषण ना केवल श्रवण शक्ति छीन सकता है, बल्कि लगातार तेज आवाज किसी भी व्यक्ति का मानसिक संतुलन बिगाडऩे के साथ ही उसके ब्लड प्रेशर, पल्स और शुगर लेवल को भी बढ़ा सकती है। इससे हृदयाघात (कार्डियो अटैक) जैसी गंभीर स्थिति भी आ सकती है।
टिनिटस का कारण है ध्वनि प्रदूषण
मंगलवार को मनाए जाने वाले विश्व श्रवण दिवस पर 'राजस्थान पत्रिकाÓ ने शहर के ईएनटी विशेषज्ञों से बात की तो सामने आया कि मौजूदा दौर में बढ़ते ध्वनि प्रदूषण से आमजन में कानों की बीमारी टिनिटस तेजी से बढ़ रही है। तेज आवाज से होने वाले इस रोग में कान की नसों को गंभीर नुकसान पहुंचता है। जिसमें कई मर्तबा व्यक्ति का सुनना तक बंद हो जाता है। वहीं कुछ मामलों में ऊंचा सुनने की समस्याएं आती हैं।
मौजूदा हालात में इसकी मुख्य वजह तेज आवाज में म्यूजिक, हॉर्न और फैक्ट्री की मशीनों के बीच काम करना है। विशेषज्ञों के मुताबिक 50 से 60 डेसिबल से ज्यादा तेज आवाज से कान की श्रवण शक्ति को नुकसान पहुंच सकता है। इसमें 80 से 90 से अधिक आवाज व्यक्ति को मानसिक अवसाद, ब्लड प्रेशर, पल्स और शुगर लेवल तक को बिगाड़ सकता है। तेज आवाज से व्यक्ति में टिनिटस की समस्या होती है। इसमें किसी फैक्ट्री या साउंड सिस्टम के शोर से श्रवण शक्ति पर प्रभाव पड़ता है। सुनने की क्षमता प्रभावित होने को टिनिटस कहा जाता है।
80-90 डेसिबल तक खतरनाक
जवाहरलाल नेहरू अस्पताल में नाक, कान, गला विभाग विभागाध्यक्ष डॉ. बी.के. सिंह ने बताया कि सामान्य जीवन में किसी व्यक्ति को 80-90 डेसिबल तक की आवाज लगातार 8 घंटे तक सुनाई जाए तो उसकी सुनने की शक्ति खत्म हो सकती है। सड़क पर वाहनों के प्रेशर हॉर्न, 50 हजार वाट्स के डीजे सिस्टम बिना अनुमति के बजाए जाते हैं। इसी तरह दीपावली पर पटाखे व बम की आवाज भी सुनने की क्षमता को प्रभावित करती है। त्यौहारी सीजन में ऐसे मरीजों की संख्या ज्यादा रहती है। होली पर फोड़े जाने वाले रंग के गुब्बारे भी कानों के पर्दों को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
आम है टिनिटस
ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. विजय गक्खड़ ने बताया कि नॉइज इनड्यूज हेयरिंग लॉस स्थाई और अस्थाई होता है। अस्थाई में पटाखे, बम फटने से कानों में लगातार सूं-सूं की आवाज आती है। जो कुछ देर बात ठीक हो जाती है। लेकिन कई मर्तबा लगातार रहती है। इसी को टिनिटस कहा जाता है। इसमें कान की नस को नुकसान पहुंचता है। अस्थाई समस्या में उपचार है लेकिन कई बार सुनना बंद भी हो जाता है। इसमें कान की नसों को गहरा नुकसान पहुंचता है जिसे ऑपरेशन (इनप्लांट) से ठीक करने का प्रयास किया जाता है।
विश्व श्रवण दिवस पर आज कार्यक्रम
मंगलवार को वल्र्ड हियरिंग-डे पर दोपहर डेढ़ बजे जवाहरलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग, ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ स्पीच एण्ड हियरिंग मैसूर और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के संयुक्त तत्वावधान में राष्ट्रीय बधिर निवारण पर सेमीनार आयोजित किया जाएगा। इसमें बधिर स्कूल के विद्यार्थी व उनके परिजनों के अलावा अन्य स्कूली छात्र-छात्राओं को भी जानकारी दी जाएगी।





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