जयपुर. मानसरोवर जैसी बड़ी कॉलोनी और कमोबेश पूरे शहर को सबसे बड़ी सब्जी की मुहाना मंडी से जोडऩे वाला करीब पांच किलोमीटर लम्बा इस्कॉन रोड़। आम तौर पर सडक़ के दोनों ओर दर्जनों बड़े मैरिज गार्डन बड़ी गहमागहमी का केन्द्र होते हैं, लेकिन आज सब शांत था। इसी सडक़ पर रोजाना में मंडी की ओर जाने वाले बड़े ट्रकों और बिल्डिंग मैटेरियल आपूर्ति के वाहनों की इस कदर आवाजाही होती है कि छोटे वाहनों का निकलना भी मुश्किल होता है। लेकिन जनता कफ्र्यू में नजार बिल्कुल अचंभित करने वाला था। पूरी तरह से सन्नाटा।
दादूदयाल नगर, पटेल नगर, मोतीनगर, जयपुर और इस्कॉन मंदिर के आसपास की दर्जनों छोटी-बड़ी कॉलोनियों में लोग अपने घरों में ही बंद रहे। केसर नगर चौराहे पर सांगानेर स्टेशन, मोहनपुरा बालाजी, मानसरोवर और मंडी, चारों ओर से आने वाली सडक़ों पर देर शाम तक वाहनों की आवाजाही बिल्कुल कम रही। इक्का-दुक्का कोई वाहन वाहन या लोग आते भी तो चौराहे पर तैनात पुलिसकर्मी उन्हें समझाइश कर वापस अपने घरों को भेज रहे थे।
इलाके में तीन प्रमुख पेट्रोल पंप खुले थे, लेकिन ग्राहक नजर नहीं आए। कर्मचारी बाहर ही कुर्सियां डाल कर बैठे रहे। मुहाना मंडी के मुख्यद्वार पर ट्रकों की कतार लगी थी। वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों से पूछने पर बताया कि मंडी बंद होने के कारण इन ट्रकों को यहीं रोक लिया गया है। प्रशासन का आदेश आने के बाद ही अनुमति दी जाएगी। कुछ ट्रकों में कैरियां लदी थीं। जबकि कुछ ट्रक माल उठाने के लिए जा रहे थे। मंडी के भीतर जहां रोजाना में बड़े-बड़े डॉम सैंकड़ों फुटकर दुकानों, थोक विक्रेताओं और हजारों ग्राहकों की आवाजाही से गुलजार रहते हैं, वहीं जनता कफ्र्यू में ढ़ूंढने से भी लोग नहीं मिल रहे थे।
एक कोने में कुछ हलचल हुई तो वहां देखने पहुंचे। पता चला कि नींबू के ट्रक से माल उतारा जा रहा है। मजदूर विनोद कुमार और शंकर सिंह से बात की तो उन्होंनेे बताया कि अगर माल एक दिन भी गाड़ी में और पड़ा रहा तो पूरे नींबू खराब हो जाएंगे। ऐसे में इसे उतार कर बाहर बरामदे में रखना जरूरी है। यदि कोरोना को लेकर यह हाल नहीं होता तो पूरा माल बाजार में चला जाता। लेकिन अब यह हमारी जोखिम बन गया है।





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