बीकानेर. 'गढन कोटा सू गवरल उतरी, गवरल रूडो एे नजारो तीखो नैणो रोÓ, 'चढ़ती रा गवरल बाजै घूघरा, उतरती री रमझोळÓ, 'म्हारी चांद गवरजा, गवर्यो री मौज्यों बीकानेर मेंÓ सरीखे गणगौर गीतों की गूंज शहर में शुरू हो गई है। बालिकाएं और पुरूषों की मण्डलियो ने पारम्परिक गणगौरी गीतों का गायन शुरू कर दिया है। धुलण्डी के दिन से शुरू हुए गणगौर पूजन उत्सव में जहां बालिकाएं अच्छे वर एवं अच्छे घर की कामना को लेकर मां गवरजा का पूजन-अनुष्ठान कर रही है, वहीं पुरुषों ने भी मां गवरजा का स्तुति गान शुरू कर दिया है।
होलिका दहन की राख से बनाई गई पिण्डोलियों को मिट्टी के पाळसिए में रखकर अबीर, गुलाल, इत्र, पुष्प आदि पूजन सामग्रियों से बालिकाएं पारम्परिक गणगौरी गीतों के गायन के बीच मां गवरजा का पूजन कर रही है। यह पूजन अनुष्ठान अठारह दिनों तक चलेगा। इस दौरान दांतणिया, बासा और घुड़ला की परम्पराएं भी होगी।
भरेंगे मेले, होगी गणगौर दौड़
गणगौर पूजन उत्सव के दौरान शहर में जगह-जगह गणगौर के मेले भरेंगे। जूनागढ़ में बारहमासा और धींगा गणगौर का मेला भरेगा। चौतीना कुआ, ढढ्ढों का चौक, बारह गुवाड़ चौक, जस्सूसर गेट सहित कई स्थानों पर मेले भरेंगे। चौतीना कुआ से गणगौर दौड़ का आयोजन होगा।





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