अजमेर. राज्य सरकार ने छह दिन पहले नगर निगम की राजस्व अधिकारी रेखा जैसवानी को एपीओ करते हुए तत्काल प्रभाव से डीएलबी निदेशालय में उपस्थिति देने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद डीएलबी के आदेशों को दरकिनार कर जैसवानी को निगम में ही शरण देते रहे।
जैसवानी के रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़े जाने की सूचना के बाद रातोरात बैक डेट में रिलीव करने की कार्रवाई की गई है। इसकी पुष्टि इस बात से होती है कि गुरुवार रात करीब 8.25 बजे निगम आयुक्त चिन्मयी गोपाल से पूछा गया तो उनका कहना था कि जैसवानी को रिलीव करने की कार्रवाई अभी प्रक्रियाधीन है। इसके ठीक आधा घंटे बाद रात नौ बजे उपायुक्त गजेन्द्र रलावता ने फोन करके जानकारी दी कि जैसवानी को बुधवार शाम को ही रिलीव कर दिया गया था। जबकि सूत्रों की मानें तो जैसवानी गुरुवार को भी करीब तीन घंटे निगम में ही थी।
साधारण सभा में चेताया था महापौर ने
नगर निगम की साधारण सभा में पार्षदों ने ठेले वालों से अवैध वसूली का मुद्दा उठाते हुए अधिकारियों को घेरा था। पार्षद नीरज जैन, समीर शर्मा, चंद्रशेखर बालोटिया, श्रवण टोनी आदि ने जैसवानी का नाम लिए बिना यह आरोप लगाए थे कि शहर में गरीब ठेले वालों से अवैध रूप से पैसे वसूले जा रहे हैं। इस पर महापौर धर्मेन्द्र गहलोत ने यह कहते हुए अधिकारियों को चेताया था कि समझने वाले इशारों में समझ जाएं और सावधान हो जाएं।
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