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WOMEN'S DAY 2020 : दिव्यांगजन और बेसहारा की सहारा बनीं ‘शोभा’

कालीचरण
अजमेर /मदनगंज-किशनगढ़. किशनगढ़ की बेटी शोभा शर्मा न केवल अजमेर बल्कि प्रदेश और अन्य राज्यों के दिव्यांगजन, विधवा, घरों से बिसराए बेसहारा लोगों की सहारा बनी हुई है। वह जरुतमंदों की ना केवल सहायता बल्कि उनका खेल कौशल तराशनें और आर्थिक मदद भी करती है। सामाजिक सेवा के साथ ही लोकसभा और विधानसभा चुनावों में दिव्यांग मतदाताओं की मतदान में मदद करने पर दौसा जिला कलक्टर नरेश कुमार शर्मा ने शोभा को पांच साल के लिए दौसा जिले का ब्रांड एम्बेसडर भी घोषित किया है। वहीं राज्य सरकार की ओर से उन्हें जयपुर में समारोह में अवार्ड देकर नवाजा गया।


किशनगढ़ के कृष्णापुरी निवासी शोभा के दोनों पैर दो साल की उम्र में ही पोलियोग्रस्त हो गए। पिता श्यामसुंदर शर्मा (हरियाणा गौड ब्राह्मण) एवं मां सुशीला ने इलाज करवाने की कोशिश भी की, लेकिन कुछ नतीजा नहीं निकला। दोनों पैरों से लाचार होने के बावजूद शोभा बचपन में घर, पड़ौस और स्कूल में नॉर्मल बच्चों के साथ ही खेला करती थीं। 9 वीं कक्षा उत्तीर्ण करने के बाद स्कूल आने-जाने में परेशानी होने ली, लेकिन वह निराश नहीं हुई और घर से ही पढ़ाई करने का निर्णय लिया। इसके बाद उसने पीछे मुड़ कर नहीं देखा और दसवीं और बारहवीं पास की। पढऩे के लिए वह जयपुर चली गईं और खुद अकेली किराए के कमरे में रह कर एमए और बीएड की डिग्री हासिल की।

दीदी अपना घर आश्रय स्थल बनाया
शोभा ने जीवन साथी भी दोनों पैरों से दिव्यांग दौसा के प्रेम मोहन शर्मा को चुना और वह वर्ष 2007 में विवाह बंधन में बंधी। सेवा कार्यांे में रूचि के कारण वर्ष 2016 में नारी शक्ति (शोभा) ट्रस्ट बना लिया। अब शोभा ने पीहर की भांति ही ससुराल में भी सभी नारी उत्थान से जुड़े कार्य शुरू कर दिए। शादी के बाद शोभा ने दौसा में दीदी अपना घर आश्रय स्थल भी बना लिया। ताकि कोई भी दिव्यांग महिला-पुरुष, विधवा, तलाकशुदा, बीमार, गभर्वती महिला की सहायता, वृद्धजन की सेवा एवं अन्य किसी भी प्रकार का जरुरतमंद यहां रह सके। यहा उसके रहने, खाने और कपड़े इत्यादि सभी नि:शुल्क मुहैया कराने के लिए पैसा भी शोभा खुद अपने स्तर पर ही बंदोबस्त करती है। वह कहती है कि पति प्रेममोहन शर्मा की महीने के वेतन मे से आधी राशि आश्रय स्थल पर खर्च करती है।

खेलों में जीते गोल्ड, सिल्वर और कांस्य

शोभा ना केवल दूसरे दिव्यांजन को खेलने के लिए प्रेरित करती है बल्कि खुद भी एक अच्छी खिलाड़ी भी है। नेशनल और स्टेट पैरा एथैलिटिक्स टूर्नामेंटों में वर्ष 2016 से 2019 तक 3 गोल्ड, 4 कांस्य एवं 1 सिलवर पदक जीते हैं। शोभा ने अभी हाल ही में प्रदेश की दिव्यांग महिला क्रिकेट टीम भी तैयार की है और अजमेर में इसकी ट्रायल भी ली। इस टीम ने कोटा में हुए टूर्नामेंट में भी हिस्सा लिया।

गरीब परिवार की बेटी को लिया गोद

शोभा ना केवल दूसरों की मदद करती हैं, वह इनका सहारा भी बनी हैं। वर्ष 2012 में एक गरीब परिवार की बच्ची को भी गोद ले लिया। वह पुत्र दर्शिन और गोद ली पुत्री कविता दोनों की परवरिश एक जैसी करती हैं। कविता ने 10 वीं पास कर ली है और फिलहाल कविता आईटीआई में प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हंै। साथ ही वह उसे हाईकोर्ट में जॉब की तैयारी भी करवा रही है


देशभर में काम करने का जज्बा

वह नारी शक्ति (शोभा) ट्रस्ट के जरिए शोभा ने राजस्थान के सभी जिलों के साथ ही पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, छत्तीसगढ़ और उत्तरप्रदेश में भी अपनी टीम तैयार कर यहां सामाजिक सरोकार एवं नारी शक्ति उत्थान के कार्य कर रही है।

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