वीमन डे स्पेशल : खुद ही को किया बुलंद, खुदा ने पूछा तेरी रजा क्या है
कोटा. 'खुद ही को कर बुलंद इतना कि खुदा बंदे से पूछे - बता तेरी रजा क्या हैÓ ख्यात शायर अल्लामा इकबाल की इन पंक्तियों को शहर की कुछ बेटियों और महिलाओं ने अपने जेहन में जरूर बिठा लिया हैं। जिंदगी में हर कदम वे अपने हक के लिए लड़ी, मुसीबतेेंं आई, लेकिन हारी नहीं। आखिर हारकर तकदीर भी इनके साथ हो गई। इन्होंने न सिर्फ समाज में अपना मुकाम बनाया, बल्कि प्रेरणा बन अपने जैसी अन्य महिलाओं की सहयोगी भी बन रही हैं। बात ऑटोचालक काली बाई की हो या कमांडो सोनिया की। ये अपने-अपने क्षेत्र में खास मुकाम रख्ती है। ये सभी मानती हैं - मुसीबत को बड़ी समझेंगे तो वो और बड़ी होगी। महिला दिवस के उपलक्ष्य में हमने इन्हीं प्रेरणादायी महिलाओं से बात की....
लक्ष्मी : जिसे मदद चाहिए थी, अब वो खुद 'हेल्परÓ है
परिस्थितियों से लडऩे का तरीका कोई सीखे तो दिव्यांग लक्ष्मी से। पिता ने मजदूरी कर दृष्टिहीन बेटी लक्ष्मी को पढ़ाया। लक्ष्मी ने भी पिता के त्याग को खाली नहीं जाने दिया। आरआरसी का एग्जाम दिया और सलेक्ट हुई। हाल ही में लक्ष्मी की रेलवे विभाग कोटा में पोस्टिंग हुई है। लक्ष्मी बताती है कि जीवन में हार को कहीं जगह नहीं दी, यही सफलता का कारण बनी। मूलत: खरगोन एमपी निवासी लक्ष्मी बताती है कि उसने ब्रेल लिपी सीखी, फिर कुछ कर गुजरने का सपना देखा। हॉस्टल में रहकर तैयारियों में जुट गई और कामयाबी मिल गई। वह रेलवे में हेल्पर है। वह लैपटॉप चला लेती है। बीए करने के बाद मास्टर डिग्री ली। लक्ष्मी बताती है कि नौकरी लगी तो मां मंजूला व पिता गुलाबचंद की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। मां हर दिन फोन कर हाल पूछती है। मां कहती है कि कुछ पाने के लिए कुछ तो खोना ही पड़ता है। वह कहती है कि उसे जो कार्य मिलेगा वह मेहनत से करेगी।
प्रेरक वाक्य : जीवन में हार को जगह मत दो।
ममता : मुसीबतें आएंगी, लेकिन जिंदगी एक सफर है सुहाना
हाथों में टिकट की डायरी। चलती बस में यात्रियों की ओर बढ़ते कदम। एक-एक को टिकट थमाकर यात्रा के लिए हरी झंडी देती ममता को पहली बार कोई देखता है तो चौंके बिना नहीं रहता। वह 10 वर्षों से रोडवेज की नौकरी में है। डबल एमए व बीएड ममता हंसते हुए कहती है - मुश्किलें कौनसी नौकरी में नहीं है। मुश्किलें हर कदम पर आती है। लेकिन उसे आप खुद किस तरह से लेते हैं, वह खुद पर निर्भर करता है। रावतभाटा रूट पर परिचालक ममता कहती है कि - कई बार यात्रियों से बहस भी होती है, लेकिन अक्सर सम्मान ही मिलता है। यह खुशी के पल होते हैं। ममता का पूरा परिवार रोडवेज की सेवा में रहा, इसलिए उसे इस नौकरी के गुण विरासत में मिले हैं।
प्रेरक वाक्य : मुसीबतों से डरेंगे तो वे और डराएंगी, इसलिए डरें नहीं।
कालीबाई : घर चलाना था, इसलिए ऑटो चलाया
हुनर कभी हारने नही देता। कोशिश की चाबी से जिंदगी की गाड़ी पटरी पर लौट ही आती है। यह मानना है प्रदेश की पहली महिला ऑटो चालक कालीबाई का। 65 वर्षीय काली बाई ने जीवन में आई परेशानियों को धता बता न केवल परिवार को संभाला, बल्कि दूसरी हारी हुई महिलाओं में भी जीवन में भी उम्मीद की रोशनी दी। कैंसर जैसी गम्भीर बीमारी में पति को खोने के बाद परिवार की सारी जिम्मेदारी उन्होंने बखूबी संभाली।
घर चलाने के लिए उन्होंने ऑटो चलाने का फैसला किया। पहले साइकिल, फिर दो पहिया चलना सीखा। फिर किराए पर ऑटो ले लिया। वे कहती हैं कि जब सड़क पर ऑटो लेकर निकलती तो लोग बातें बनाते, लेकिन परवाह नहीं की। धीरे धीरे लोगों की सोच बदली और मेरे काम को सम्मान मिलने लगा। सामाजिक कार्यकर्ता हेमलता गांधी ने भी मेरी मदद की।
प्रेरक वाक्य: बुरे दिन भी गुजर जाते हैं, बस खुश रहो।
तान्या : इसके हाथ लगे तो पत्थर भी बोल उठते हैं
नौकरीपेशा ही नहीं, आज कारोबार में भी महिलाएं, पुरुषों से पीछे नहीं है। इसका एक उदाहरण है कोटा की युवा एंटरप्रेन्योर तान्या चौहान। तान्या ने अपने करियर की शुरुआत बतौर डेंटिस्ट की थी, लेकिन सपना स्टार्टअप शुरू करने का ही था। आर्ट और कल्चर में दिलचस्पी थी, इसलिए श्रलील रॉक्स के नाम से स्र्टाटअप की शुरुआत की। पत्थरों पर मंडल आर्ट के जरिए तान्या के स्टार्टअप को पहचान मिली है। तान्या बताती हैं कि मंडल आर्ट का हिंदू और बौद्ध धर्म में आध्यात्मिक और धार्मिक महत्व है। तनाव और मेडिटेशन के लिए भी ये महत्वपूर्ण हैं। इसलिए इन दिनों आर्ट और होम डेकोर में मंडल आर्ट का खासा चलन है
प्रेरक वाक्य: सुनो सब की, करो मन की
सोनिया : पहले खुद मजबूत बनी, अब दूसरों को बना रही
लड़कियों को कमजोर समझना, उसे खूब अखरता है। यही वजह रही कि पुलिस कमांडो सोनिया ने परिवार को बिना बताए मार्शल आट्र्स को प्रशिक्षण लिया। पुलिस की नौकरी करने के बाद कमांडों की ट्रेनिंग ली और वह महिलाओं को आत्मरक्षा के गुर सीखा रही है। सोनिया अब तक 3900 महिलाओं और लड़कियों को आत्मरक्षा का प्रशिक्षण दे चुकी है। वो बताती है कि अपनी मर्जी का काम करने के लिए न सिर्फ परिवार बल्कि समाज का भी विरोध झेलना पड़ा। वे कहती है कि महिलाओं को हमेशा खुद पर विश्वास रखना चाहिए। कुछ अच्छा करने की काबिलियत रखनी चाहिए। मार्शल आर्ट, कराटे, वुशू, ताइक्वांडो, बॉक्सिंग सभी में सोनिया अव्वल है। फायरिंग, रेपलिंग, 10 किलोमीटर रन व मोटरसाइकिल स्टंट उसकी दिनचर्या का हिस्सा हैं।
प्रेरक वाक्य: गलत बात का हमेशा विरोध करना चाहिए।
कनीज फातिमा: गंदगी से निकाल संवारी कई जिंदगियां
यह शख्सियत है कनीज फातिमा। इन्होंने सब इंस्पेक्टर के प्रमोशन के बाद मानव तस्करी विरोधी यूनिट में प्रभारी के पद रहते हुए कई बेटियों का भविष्य संवारा। यही नहीं, देहव्यापार दलदल से निकाल 21 कंजर जोड़ों का विवाह करवाया। वे कहती हैं - इस मुकाम तक पहुचंने के लिए बाहर वालों के साथ घर वालों का भी विरोध झेलना पड़ा। पहले लोगों की मानसिकता थी कि बेटी घर से ही नहीं निकले। पढ़ाई और नौकरी तो दूर की बात थी, लेकिन पिता ने साथ मिला तो मैंने घर की दहलीज को लांघ नौकरी भी की और समाज सुधार के अपने सपने को साकार भी किया। इसके लिए समाज के लोगों का विरोध भी सहा। इस काम के लिए उनका कई बार सम्मान भी हो चुका है। रिटायरमेंट के बाद भी उनका बाल कल्याण समिति में बतौर अध्यक्ष पद पर सलेक्शन हुआ।
प्रेरक वाक्य: आगे बढऩा है, तो विरोध को पीछे छोडऩा पड़ेगा





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