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प्रवासी मजदूरों के मामले में नहीं राज्यों में समन्वय

- श्रमिकों को हर कोई अपने राज्य से भेजकर पाना चाहता है निजात
- संबंधित राज्यों को नहीं दी जाती पूर्व सूचना
प्रतापगढ़. कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए देशभर में चल रहे लॉकडाउन के दौरान सबसे ज्यादा परेशानी प्रवासी मजदूरों को भुगतनी पड़ रही है। कामधंधा छिनने के बाद अब वे अपने -अपने राज्यों को पलायन कर रहे हैं। इस दौरान संबंधित राज्य की सरकारें उन्हें बसों से दूसरे राज्य में छुड़वा रही है। लेकिन इस कार्य में राज्यों के बीच आपस में कोई समन्वय नहीं है। यह बात सोमवार को कर्नाटक से 70 बसों में भरकर प्रतापगढ़ छोड़े गए करीब दो हजार प्रवासी श्रमिकों के मामले में सामने आई। ये बसे कर्नाटक से पांच दिन पहले चली, लेकिन इसकी पूर्व सूचना न तो प्रतापगढ़ जिला प्रशासन को दी गई और न ही जयपुर में राज्य सरकार को। नतीजा यह रहा कि जब सोमवार को इतनी बसों का काफिला राजस्थान की सीमा पर पहुंचा तो पुलिस में हडक़ंप मच गया। तुरंत जिला प्रशासन को सूचना दी गई। हालांकि पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों ने कर्मचारियों के साथ दिनभर मशक्कत कर मामले को संभाल लिया, लेकिन भूखी प्यासी भीड़़ कभी भी बेकाबू हो सकती थी।
कनार्टक में फैले राजस्थान के श्रमिकों को बुलाकर भेज दिया
कनार्टक सरकार ने अपने पूरे राज्य में फैले राजस्थानी श्रमिकों को विजयपुरा में बुलाया और वहां से बसों में भरकर सीधे राजस्थान के लिए चल दिए। इस काफिले का नेतृत्व डीवाईएसपी की अगुवाई में एक पुलिस टीम कर रही थी। यह काफिला गूगल मैप के सहारे राजस्थान के लिए रवाना हुआ और मध्यप्रदेश के मंदसौर होता हुआ राजस्थान की सीमा पर प्रतापगढ़ की राजपुरिया चौकी के पास रूक गया। एक साथ इतनी बसों को आते देख स्थानीय पुलिस के हाथ पैर फूल गए। उन्होंने पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों को सूचना दी।
अधिकारियों ने मुस्तैदी से संभाली स्थिति
पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों ने बताया कि इस काफिले में राज्य के 25 जिलों के 1714 लोग थे। इनमें महिलाएं और बच्चे भी थे। अधिकांश भूखे प्यासे थे। इसके अलावा करीब 120 लोग हरियाणा और उत्तरप्रदेश के थे। गनीमत यह रही कि भीड़ काबू में रही। जिला कलक्टर अनुपमा जोरवाल, एसपी पूजा अवाना सहित जिला प्रशासन और चिकित्सा विभाग के आला अधिकारियों ने तुरंत मौके पर पहुंच कर हालात संभाले, अन्यथा भीड़ आक्रोशित होकर नियंत्रण से बाहर भी हो सकती थी। इस दौरान मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों का कहना था कि कर्नाटक सरकार का रवैया इस मामले में ऐसा था मानो वह इन प्रवासी मजदूरों से कैसे भी पिंड छुडाऩा चाहती थी।
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पहले नहीं बताया गया
सोमवार सुबह ही हमें कर्नाटक से आई बसों के काफिलें के बारे में पता चला। इस काफिले की पूर्व सूचना कर्नाटक सरकार से नहीं मिली। हालांकि प्रशासन ने सब कुछ अच्छे से मैनेज कर लिया, लेकिन पूर्व सूचना होती तो समन्वय से बेहतर काम होता।
-अनुपमा जोरवाल, जिला कलक्टर, प्रतापगढ़



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