बुरहानपुर रिपोर्ट :
केस-1 : ये नासिक से खंडवा पैदल निकल पड़े
खंडवा के रहने वाले मुकेश और नानुराम। नासिक महाराष्ट्र में भवन निर्माण में ठेकेदार के पास काम करते हैं। यह दोनों मिले बुरहानपुर सीमा से लगे लोनी गांव में। ३८ डिग्री के पारे में दोपहर १.३० बजे सूनसान हाईवे पर अकेले पैदल चलते हुए। इनका कहना है कि यह ठेकेदार ने फोन उठाना बंद कर दिया। घर में रखा राशन समाप्त हो गया। इसलिए अब अपने घर खंडवा जा रहे हैं। रास्ते में कही ट्रक मिला तो सहारा मिल गया, नहीं तो पैदल ही निकल पड़े। 1
केस-2
कोयंबटूर से निकले महाराष्ट्र में खाना तक नहीं मिला
कोयंबटूर में ग्रेनाइट पत्थर कटिंग का काम करने वाले २८ प्रवासी काम न मिलने से अब अपने गृह क्षेत्र राजस्थान निकल पड़े। यह भी कभी ट्रक से तो कभी पैदल होते हुए बुरहानपुर पहुंचे। पहले तो सीमा पर सभी को रोक लिया। सबसे पहले इन्हें जिला अस्पताल में उपचार के लिए भेजा। यहां कोई भी संक्रमित नहीं पाया। यहां से सभी को भोन कराकर ट्रक से आगे की ओर भेजा गया। इसमें शामि रिशी, श्याम ने बताया कि केरल तक बेहतर खाना मिल रहा है। लेकिन महाराष्ट्र में पानी को भी तरस गए। अब बुरहनपुर आने पर भोजन मिला।
यहां दोनों सीमाओं पर तैनात है पुलिस
बुरहानपुर से ८ किमी दूर महाराष्ट्र सीमा से लगे लोनी गांव में बनी चौकी पर प्रत्येक आने जाने वाले वाहनों को रोककर चालकों से पूछताछ की जा रही है।
बुरहानपुर. लॉकडाउन के दस दिन बीत चुके हैं, अब काम के लिए अन्य शहरों में रहने वाले लोगों के घरों में राशन पानी समाप्त होने के बाद वे अपने गृह नगर की ओर निकल पड़े हैं। हर रोज १०० प्रवासी अपना सामान कंधे पर लादकर हाईवे पर पैदल चलते हुए अंतरराज्यीय सीमा से बुरहानपुर में आ रहे हैं। जहां उनके रुकने के लिए जिला प्रशासन ने बुरहानपुर की सीमाओं पर ठहरने के इंतजाम किए गए हैं। खाने और नाश्ते से लेकर बेहतर व्यवस्था इनके लिए की है।
सबसे अधिक आवागमन महाराष्ट्र के रावेर से होते हुए बुरहानपुर के लोनी सीमा से हो रहा है। जहां प्रवासियों के लिए बहादरपुर में बने आदिवासी बालक अंग्रेजी आश्रम केंद्र को प्रवासी केंद्र बनाया है। प्रशासन की ओर से देड़तलाई, इच्छापुर और बहादरपुर में आश्रय स्थल बनाए हैं। यहां दो दिन तक प्रवासियों को ठहराने के बाद इन्हें अपने गंतव्य की ओर ट्रक से भेजा जा रहा है। बहादरपुर में बुधवार को ३८ लोगों को देड़तलाईभेजा गया। अब यहां पर गुरुवार को ३३ प्रवासी ठहरे रहे, इनमें उत्तर प्रदेश के रहने वाले हैं।





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