जयपुर. पूरा विश्व कोरोना वायरस के संक्रमण से जूझ रहा है। सबसे बुरा हाल अमरीका, स्पेन, इटली का है। यहां स्थिति दिन व दिन खराब होती जा रही है। इन विकसित देशों में कहीं सुविधाओं का अभाव है तो कहीं निर्णय लेने में देरी का खामियाजा वहां की जनता को उठाना पड़ रहा है। इन देशों के नागरिकों से राजस्थान पत्रिका ने बातचीत की और जाना कि उनके देश मेे कोरोना के खिलाफ जंग कितनी कारगर साबित हो रही है।
इटली के वेनिस शहर में रहने वाली एरियाना का कहना है कि पहले की तुलना में स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन अभी भी सरकार युवाओं को बचाने पर ध्यान दे रही है। कई इलाकों में वेंटिलेटर की भी कमी है। पोलैंड की वियेरा नाउ ने कहा कि हमारे यहां चिकित्सा सुविधा लचर साबित हुई। मॉस्क, ग्लब्ज व अन्य जरूरी सामान भी लोगों तक नहीं पहुंच पाए हैं। वहीं अमरीका के न्यूयॉर्क में रहने वाली अबीगैल कहती हैं कि प्रशासन की गलती का खामियाजा लोग भुगत रहे हैं। यहां शुरुआत में सब कुछ चालू रखने की कोशिश की गई, उससे हालात बिगड़े। नर्सिंग स्टाफ अच्छा काम कर रहा है, लेकिन सब कुछ उनके हाथ में नहीं है।
तो अब तक जीत चुके होते जंग
अर्जेंटीना के पाउलो कहते हैं कि भारत में संक्रमण न फैलने का सबसे बड़ा कारण वहां की सरकार का अपनी जनता के प्रति रूखा रवैया है। सरकार ने अपने लोगों को बचाने के लिए सख्त कदम उठाए। उन्होंने कहा कि यदि भारत में जमातियों की वजह से केस नहीं होते तो यह जंग अब तक वहां जीती जा चुकी होती।
यहां से सीखने की जरूरत
कोरोना से संक्रमित होने की जानकारी होने पर लोग खुद चिकित्सा टीम या फिर प्रशासन को फोन कर जानकादी देते हैं, जबकि हमारे यहां कई मामले ऐसे आए हैं, जिनमें लोगों ने जानकारी छिपाई है। यहां स्थिति यहां तक पहुंची कि लोग क्वारंटाइन से बचने के लिए घर से भाग तक गए।
देश - कुल केस- मौत
अमरीका- 560433 22115
स्पेन 169496 17489
इटली 156363 19899
भारत 9240 331





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