झुंझुनूं. एक माह से अधिक समय से चल रहे लॉकडाउन के कारण किसानों की ओर से रबी फसलों की कटाई व थ्रेसिंग का कार्य करीब-करीब पूरा कर लिया गया। रबी फसलों की कटाई के उपरांत किसानों की ओर से जायद फसल के रूप में हरे चारे की बुआई की जाती है। परंतु इस बार लॉकडाउन के कारण किसानों को हरे चारे का बीज उपलब्ध नहीं है। इस बार कृषि विभाग की ओर से मिलने वाले निशुल्क चारे के मिनिकिटस नहीं मिले। वहीं, लॉकडाउन के कारण किसान खरीद नहीं सके। करीब 50 हजार किसान अपने कुओं पर एक-दो बीघा में हरे चारे की बुआई करते हैं। इस प्रकार लगभग अनुमानित सात से आठ हजार हैक्टेयर में हरे चारे की बुआई की जाती है। हरे चारे के रूप में किसानों की ओर से ज्वार व बाजरे की बुआई की जाती है।
इस बार नहीं मिलने चारे के बीज के मिनिकिट्स
अधिकारियों की मानें तो इस बार किसानों को हरे चारे के बीज के रूप में मिनिकिट्स निशुल्क नहीं दिए गए। जबकि पिछली बार कृषि विभाग की ओर से ज्वार के 8 300 मिनकिटस तथा बाजरे के 2000 मिनिकिटिस हरे चारे बीज के निशुल्क वितरित किए गए थे। ऐसे में इस बार जिले के हजारों पशुधन हरे चारे से वंचित हैं।
इनका कहना है.....
& विभाग की ओर से किसानों को उनके पास उपलब्ध देशी बाजरे के बीज की बुआई करने की सलाह दी गई है। इस बार राज्य सरकार की ओर से अभी तक बीज मिनिकिटस किसानों को निशुल्क के लिए प्राप्त नहीं हुए हैं।
डा. विजयपाल कस्वां, सहायक निदेशक कृषि (विस्तार), झुंझुनूं





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