भीलवाड़ा।
कोरोना लॉकडाउन ने शहर में प्रदूषण कम कर दिया। सड़कें साफ नजर आने लगी है। वाहनों के थमने व लोगों के घरों में रहने से सड़कों से जाम, धूल व धुआं गायब हो गया। हवा में औसतन 280 से 300 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर धूलकण अब सीधे ५० पर आ गए। नाइट्रोजन आक्साइड और सफर डॉइ ऑक्साइड जैसी हानिकारक गैसें भी कई गुना कम हो गई।
पर्यावरणविद् बाबूलाल जाजू ने कहा कि प्रदूषण घटने से जलवायु परिवर्तन व भूमंडलीय ऊष्मीकरण में कमी आ रही है। यदि लॉकडाउन के दौरान विकसित कुछ नियमों का सख्ती से पालन करें तो प्रकृति लंबे समय तक संतुलन बनाए रख सकती है। मानसरोवर, गांधीसागर, नेहरू तलाई, चावण्डिया तालाब, गुरला तालाब समेत सभी जलाशय पक्षियों से गुलजार है। ये शुद्ध पानी का आनंद ले रहे हैं। इन दिनों बनास, कोठारी नदी में पानी साफ बह रहा है क्योंकि सभी औद्योगिक इकाइयां बन्द है। नदियों में अब केवल घरों से निकला प्रदूषित पानी ही जा रहा है।
प्रदूषण मंडल के दिए जांच के आदेश
सूत्रों के अनुसार गंगा नदी के साफ होने के बाद केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने सभी राज्यों से नदियों, प्रमुख तालाब तथा जलाशयों के पानी के सेम्पल मांगे हैं। भीलवाड़ा में कोरोना कफ्र्यू के कारण अधिकारियों को जांच की स्वीकृति नहीं मिली है। अधिकारियों को ये सैम्पल जांच के लिए कोटा या जयपुर भेजेना होंगे।





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