नोवेल कोरोना वायरस के उपाय इन दिनों वॉट्स एप और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हो रहे हैं। लोग कोरोना वायरस से इस कदर डरे हुए हें कि हर उपाय को आजमाने से भी नहीं कतरा रहे हैं। आइबुप्रोफेन गर्म पानी पीने से लेकर घरेलू इलाज तक इन दिनों कोरोना वायरस से बचाने के तरीकों की इंटरनेट पर बाढ़ आई हुई हे। ऐसे में सही जानकारी और उपाय अपनाने में ही समझदारी है। इंटरनेट पर इन भ्रांतियों को रोकने वाले विशेषज्ञ इसे झूठी खबरों की महामारी यानी इन्फोडेमिक भी कह रहे हैं। जिस तेजी से कोविड-19 दुनिया भर में फैलता जा रहा है उसी तेजी से इससे जुड़ी अफवाहें और झूठी खबरें भी सोशल मीडिया के जरिए लोगों तक पहुंच रही हैं। इस बारे में विश्व स्वास्थ्य संगठन के ्रमहानिदेशक टेड्रोस अधनोम घिबेयियस ने फरवरी में सही कहा था कि हम सिर्फ एक महामारी से नहीं लड़ रहे हैं बल्कि हम एक इन्फोडेमिक से भी लड़ रहे हैं।
ऐसे बचें झूठी खबरों के जाल से-
01. अनिश्चित खबरों पर न करें भरोसा:
क्योंकि यह वायरस दिसंबर 2019 में सामने आया है इसलिए अब भी वैज्ञानिक इसके बारे में जानकारी जुटा रहे हैं। इसे ठीक से जांचने के लिए बहुत कम समय मिला है। इस बात को समझिए कि विज्ञान एक प्रक्रिया है जिसमें समय लगता है और कभी-कभी अध्ययन विरोधाभासी प्रमाण प्रस्तुत करते हैं। इसलिए कोरोना वायरस पर आई किसी भी जानकारी का स्रोत जांचे बिना भरोसा न करें।
02. कहां से आती हैं ये झूठी खबरें:
विज्ञान शोध पर लिखने वाले बहुत हैं लेकिन हर कोई इसमें प्रशिक्षित नहीं होता। कोरोना वायरस के बारे में लिखने वाले कुछ विशेषज्ञ विज्ञान पत्रकारों के पास अपनी खबरों का पर्याप्त सुबूत और सही मूल्यांकन एवं आंकड़े तक नहीं होते। इस बात का ध्यान रखें कि मूल स्रोत से मिली जानकारी की हर लेखक अपने हिसाब से व्याख्या करता है। इसलिए जब तक किसी खबर में मूल शोध या संदर्भ का लिंक न हो उस पर पूरी तरह भरोसा न करें। साथ ही यह भी पता करें कि उक्त जानकारी अन्य किन प्लेटफॉर्म पर दी जा रही है। अगर जानकारी पुष्ट है तो उसे कई साइट पर देखा जा सकता है, लेकिन अगर एक अकेला व्हाट्सएप संदेश है जिसमें कोई साक्ष्य नहीं है तो आपको भरोसा करने से पहले दो बार सोचना चाहिए।
03. पता करें कौन दावे का समर्थन कर रहा है:
नए वैज्ञानिक अनुसंधान की रिपोर्ट में अध्ययन लेखकों की टिप्पणियों के साथ संबंधित खोज से जुड़े किसी व्यक्ति की स्वतंत्र टिप्पणी भी शामिल होनी चाहिए जो लेखन में शामिल नहीं थी। हालांकि यह हमेशा संभव नहीं होता, क्योंकि हर कोई कोविड-19 महामारी के दौरानहर कोई वायरोलॉजिस्ट या महामारीविज्ञानी नहीं हो सकता। लेकिन जब तक कोई जिम्मेदार पद पर बैठा व्यक्ति दावे का समर्थ न करे उस पर भरोसा न करें।





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