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वनकर्मी भी पीपीई किट में आएंगे नजर

अश्वनी प्रतापसिंह

राजसमंद. अब वनकर्मी भी चिकित्सकों व नर्सिंग स्टाफ की तरह पीपीई (पर्सनल प्रोटेक्शन इक्विपमेंटस) किट पहनेंगे। इसके लिए वनविभाग ने किट खरीदने की तैयारी कर ली है। हालांकि राजसमंद में करीब २० दिन बाद ही पीपीई किट की वनकर्मियों को आवश्यकता पड़ सकती है। क्योंकि यहां के कुंभलगढ़ अभयारण्य क्षेत्र में वन्यजीवों को कोई कृतिम भोजन नहीं दिया जाता है उन्हें सिर्फ गर्मी के दिनों में पानी की सप्लाई बाहर से होती है और सप्लाई भी मई माह में शुरू होगी। ऐसे में वनकर्मियों को किट की जरुरत मई में ही पड़ सकती है। दरअसल अमेरिका के न्यूयॉर्क सिटी के एक चिडिय़ाघर में गतदिनों एक टाइगर कोरोना वायरस पॉजिटिव पाया गया। इससे यह पता चला कि इंसानों का वायरस वन्यजीवों को भी संक्रमित कर रहा है, जिसके बाद भारत में भी वन्यजीवों में संक्रमण के खतरे को रोकने के लिए ऐतियात बरतने शुरू कर दिए गए हैं।


इन्हें दी जाएगी पीपीई किट
वनविभाग ऐसे वनकॢमयों को पीपीई किट देगा जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से वन्यजीवों के सम्पर्क में आते हैं। राजसमंद के कुंभलगढ़ अभयारण्य में चूंकि बाघ नहीं है और ना ही कोई वन्यजीव इनक्लोजर या चिडिय़ाघर में हैं, ऐसे में वन्यजीव प्राकृतिक शिकार करके ही भोजन ग्रहण करते हैं, उन्हें कृत्तिम भोजन नहीं दिया जाता, इसलिए प्रत्यक्ष रूप से वनकर्मी वन्यजीवों के सम्पर्क में नहीं आते। अब गर्मी का मौसम होने से कुछ जलाशयों में पानी सूख जाएगा, इसलिए इन जलाशयों में टैंकर आदि से भी पानी की सप्लाई होगी, ऐसे में पीपीई किट उन्ही वनकर्मियों को दिए जाएंगे जो पानी की सप्लाई के लिए जंगलों में जाएंगे। क्योंकि वही अप्रत्यक्ष रूप से वन्यजीवों के सम्पर्क में आ सकते हैं।


मई से शुरू हो सकती है पानी की किल्लत
राजसमंद में इसबार औसत से ज्यादा बारिश होने के कारण अधिकतर जलाशयों में अभी पानी है। हालांकि गर्मी के बढ़ते तेवर जलाशयों का पानी को सुखा रहे हैं, जिससे कई जलाशयों में पानी तलहटी पर पहुंच चुका है। ऐसे में वनविभाग मई माह के शुरुआत में इन जलाशयों में टैंकर से पानी सप्लाई करवाएगा, जलाशयों को गहरा भी करवाया जाएगा, पानी लिफ्ट कराकर इनमें भरा जाएगा ताकि उनमें पानी कुछ दिन और चल सके, लेकिन यह सभी गतिविधियां मई माह में ही शुरू होंगी। ऐसे में राजसमंद में पीपीई किट की आवश्यकता भी मई माह में ही पड़ेगी।


कुंभलगढ़ अभयारण्य में ये हैं वन्यजीव
कुंभलगढ़ और रावलीटाडगढ़ में एक दर्जन से अधिक प्रजाति के मांसाहारी तथा दो दर्जन से अधिक प्रजाति के शाकाहारी वन्यजीव हैं। जिसमें पैंथर, सियार, जरख, लोमड़ी, भेडिय़ा, बिल्ली, भालू, बिज्जू, नेवला साधारण, नेवला (कालीपूंछ), भारतीय लोमड़ी आदि मुख्य रूप से वन्यजीव गणना में दिखाई देते हैं। वहीं शाकाहारी में साम्भर, चिंकारा, चौसिंगा (भेडल), रोजड़ा, जंगली सूअर, सेही, लंगूर, खरगोश, चीतल सहित दो दर्जन से अधिक शाकाहारी वन्यजीव नजर आते हैं।


आदेश आए हैं...
पीपीई किट खरीदने के आदेश विभाग की ओर से मिले हैं। कुंभलगढ़ अभयारण्य क्षेत्र में वन्यजीव प्राकृतिक भोजन पर ही निर्भर हैं, क्योंकि यहां न तो कोई चिडिय़ाघर है और न ही इनक्लोजर। ऐसे में पानी सप्लाई के दौरान ही हमें ज्यादा ऐतियात बरतनी है। अभी जंगल में पानी भी है, मई माह तक पानी पहुंचाने की आवश्यकता पड़ सकती है, ऐसे में जो वनकर्मी वन्यजीवों के प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सम्पर्क में आएंगे, उन्हें किट उपलब्ध करवाए जाने की बात चल रही है।
-फतेहसिंह राठौड़, डीएफओ, राजसमंद



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