भीलवाड़ा .
कोरोना संक्रमण के दौरान उद्योग बन्द होने के बाद भी उनके औसत आधार पर लाखों रुपए के बिल भेजे जा रहे है। इससे उद्यमियों में निगम की कार्यशैली को लेकर नारजगी व्यक्त की है। इस मामले में मेवाड चेम्बर ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री ने अजमेर विद्युत वितररण निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक वीएस भाटी से वार्ता की। महासचिव आरके जैन ने बताया कि चेम्बर ने भाटी का ध्यान टर्मस एण्ड कडीसंस ऑफ सप्लाई की धारा 48.4 की ओर दिलाया गया। इसमें यह उल्लेख किया कि किसी भी कानूनी लॉकआउट की अवधि में निगम उपभोक्ता से फिक्स चार्ज वसूल नही करेगा जबकि निगम अपने बिलों में फिक्स चार्ज की राशि प्रदर्शित कर केवल उसे स्थगित करने की सुविधा दे रहा है। अगर उपभोक्ता फिक्स चार्ज को स्थगित करता है तो उस पर ब्याज देय होगा। भाटी ने एग्रीमेन्ट के अध्ययन के साथ चेम्बर की मांग से सहमति जताते हुए कहा कि निगम सरकार को यह बिन्दु प्रेषित करेगा लेकिन अन्तिम निर्णय सरकार के स्तर पर ही होगा।
इस विषय में चेम्बर की ओर से मुख्यमंत्री, ऊर्जामंत्री एवं प्रभारी सचिव अजिताभ शर्मा को पंजाब एवं गुजरात के आदेशों की प्रतिलिपी सहित भेजकर फिक्स चार्ज स्थगित करने के बजाय लॉकऑउट के लिए पूर्ण रुप से हटाने की मांग की है। चेम्बर ने निगम के प्रबंध निदेशक से मासिक औसत के आधार पर बिल जारी करने का भी विरोध किया। लॉकआउट में जहां इकाई पूर्ण रुप से बन्द है, विद्युत उपयोग ही नही है, वहां औसत बिल लेना गलत है। प्रबंध निदेशक ने चेम्बर को बताया कि जो इकाईयां अपनी मीटर रिडिंग की फोटो लेकर वाट्सअप से विद्युत निगम को प्रेषित कर देगी, उनके बिल वास्तविक उपभोग के आधार पर जारी कर दिए जाएंगे। चेम्बर ने निगम के प्रंबंध निदेशक का ध्यान लोड फेक्टर की शर्त की ओर भी दिलाया। एक एमवीए से अधिक कनेक्टेड लोड वाली इकाईयों को न्यूनतम 50 प्रतिशत लोड फेक्टर रखने पर विद्युत दरों का निर्धारण किया जाता है। चेम्बर ने लोड फेक्टर की गणना में लोकआउट अवधि के दिनों को सम्मिलित नही करने की मांग की। लघु, मध्यम एवं वृहत सभी श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए मार्च-अप्रेल के विद्युत बिलों को स्थगित कर बाद में एक साथ वसूल करने का भी विरोध किया। चेम्बर ने मांग की कि लॉकडाउन अवधि के विद्युत बिलों को 6 माह की किस्तों में वसूल किया जाना चाहिए।





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