भीलवाड़ा .
लघु उद्योग भारती ने लॉकडाउन पीरियड में होने वाले उद्योगों को नुकसान की भरपाई के लिए शीघ्र ही उनके लय में आने के लिए केंद्र व राज्य सरकार से अपने सहयोगात्मक सुझाव दिए हैं। ताकि उद्योग आसानी से इस कोरोना वारस के कारण हो रहे नुकसान को दूर कर अपने उद्योगों को शीघ्र पटरी पर लाया जा सके। इसके लिए लघु उद्योग भारती अध्यक्ष महेश हुरकट ने मांगों को लेकर मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। इसमें सरकार से मांग की गई है कि बिजली के बिलों में स्थाई शुल्क लॉकडाउन पिरीयड के लिए हटाया जाना चाहिए तथा सोलर पावर से उत्पादित यनिट को आगामी अवधि में समायोजित किया जाए।
मुख्यमंत्री से लघु उद्योग प्रोत्साहन योजना में ब्याज अनुदान 5.8 प्रतिशत को नए उद्योगों के देने की योजना है वह वर्तमान उद्योगों को ही 2.4 प्रतिशत का ब्याज अनुदान 12 माह के लिए दिया जाना चाहिए। रीको की ओर से घोषित विशेष माफी योजना को 30 जून तक बढ़ाने की मांग की है। कोरोना एक प्रकार की आपदा है। ऐसे में ईएसआई में पंजीकृत उद्योगों का सैलरी वेजेज का भुगतान सरकार के ईएसआई फंड से किया जाना चाहिए यह फंड मेडिकल - दुर्घटना की वजह से होने वाले खर्चे व अनुपस्थिति के पिरीयड के सैलरी - वेजेज के लिए होता है इस महामारी की वजह से अनुपस्तिथति की सेलेरी - वेजेज़ का भुगतान ईएसआई फंड से किया जाना चाहिए। केंद्र सरकार से भी मांग की गई है कि सरकार की ओर से जो रिजर्व बैंक की ओर से रेपो रेट में .75 पांइंट का फायदा दिया गया है। वह बैंकों की ओर से नीचे तक उद्योगों को देने के लिए बाध्य किया जाना चाहिए। भविष्य निधि का कंट्रीब्यूशन केंद्र सरकार की ओर से 3 माह की जगह कम से कम 6 माह के लिए दिया जाना चाहिए। उद्योगों में बैंक व अन्य वित्तीय संस्थाओं की ओर से तरलता के लिए दिए गए वित्त सहायता को 25 प्रतिशत तक बढ़ाया जाना चाहिए जो अभी 10 प्रतिशत बढ़ाने के लिए कहा है।





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