पाली। कोरोना काल [ Corona period ] ने लोगों की जीवन पद्धति में कई अनूठे परिवर्तन देखे जा रहे हैं। लॉकडाउन [ Lockdown ] एवं कोरोना की भयावहता के चलते लोगों के संस्कारों में भी खासा बदलाव आ रहा है। विवाह जैसी रस्म भी बिना तडक़-भडक़ एवं प्रदर्शन के आयोजित होने लगी है। ऐसा ही विवाह [ marriage ] हुआ पाली जिले के जोजावर के निकट बासनी कस्बे में, जहां आऊवा से आई बारात में दूल्हे के साथ उसका भाई सम्मिलित हुआ एवं घरातियों में भी दुल्हन के पिता की उपस्थिति रही।
दूल्हा-दुल्हन और पंडित समेत पूरी रस्म पांच लोगों के सान्निध्य में निभाई गई। दूल्हे के भाई चंद्रप्रकाश वैष्णव ने बताया कि विवाह की तिथि पूर्व ही निर्धारित थी। पंडित ने 18 मई को शादी नियत की गई थी। चूंकि क्षेत्रभर में लॉकडाउन होने से शादी परम्परागत जोर-शोर से नहीं हो पाई, लेकिन शुभ मुहूर्त को छोडऩा भी नहीं चाहते थे। इसलिए अधिकारियों से औपचारिक स्वीकृति ली गई और प्रशासन की अनुमति से भाई चंद्रदास वैष्णव की बारात लेकर दोनों भाई दुल्हन के घर पहुंचे। वहां पंडित ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ दोनों के सात फेरे डलवाए। दोनों भाई गृह रक्षा विभाग में जवान है और उन्होंने बताया कि रस्म के दौरान सामाजिक दूरी का पूरी तरह से ध्यान रखा गया।
दूल्हे के पिता अचलदास ने बताया कि विवाह जीवनभर का बंधन होता है, लेकिन समय व परिस्थितियों का ध्यान रखना भी हमारी ही जिम्मेदारी है। बासनी में दुल्हन किरण ने अपने पिता हेमदास वैष्णव की मौजूदगी में सात फेरों के सात सात वचन निभाने का संकल्प किया। क्षेत्रभर में इस अनूठी शादी की चर्चा रही और लोगों ने बताया कि इसी रीति से विवाह होने लगे तो निश्चित ही यह प्रथा शादियों में बेलगाम हो रहे खर्चे पर अंकुश लगाने में कारगर सिद्ध हो सकती है।





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