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ब्रिटेन के पीपीई किट बेहतर, खतरे से खेलते मेड इन चाइना किट

भुवनेश पंड्या

उदयपुर. चीन से आने वाले पीपीई किट में तो वायरस को रोकने की क्षमता ही नहीं थी, ना ही ये विषाणुओं को रोक सकते थे, जबकि ब्रिटेन के किट पूरी तरह सुरक्षित हैं। दुनिया भर में जहां कोविड-१९ से चिकित्सकों के लिए सुरक्षा में सबसे महत्वपूर्ण साधन पीपीई किट माना जाता है, वहीं भारत में आने वाले ब्रिटेन और चीन के पीपीई (पब्लिक प्रोटेक्शन इक्यूपमेंट) किट में बेहतर ब्रिटेन के किट हैं, जबकि चीन के किट को भारत में विभिन्न जांचों में फेल मानते हुए नकार दिया है। भारत में भी किट बन रहे हैं, लेकिन इनकी मात्रा कम होने से उन्हें आयात करना पड़ रहा है। उदयपुर में जो किट शुरुआत में पहुंचे थे उनमें से कुछ ब्रिटेन के थे, लेकिन फिलहाल ये नजर नहीं आ रहे हैं। अब यहां पहुंचने वाले किट जयपुर की एक कंपनी सरकार के माध्यम से भेज रही है।

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ये महत्वपूर्ण बिन्दु: - कोरोना के खिलाफ लड़ाई में भारत को व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण पीपीई की कमी से जूझना पड़ रहा है। ये किट स्वास्थ्यकर्मियों को कोविड-19 से बचाव के लिए दी जाती हैं।

- पीपीई किट को यक्तिगत सुरक्षा उपकरण कहा जाता है, इसमें दस्ताने, मास्क, गाउन, सिर का ढक्कन, रबर के जूते, चश्मा, फेसशील्ड शामिल है। यह किट चिकित्सा कर्मचारियों द्वारा कोविड.19 के मरीजों के उपचार के दौरान उन्हें संक्रमण की जद आने से बचाती है। - कपड़ा मंत्रालय, ऐसे भारतीय गैर बुनाकर निर्माता सर्च कर रहा है, जो स्वास्थ्य मंत्रालय के दिशा निर्देशों के अनुरूप कोविड 19 से लडऩेके लिए एक उपयुक्त फैब्रिक विकसित करेंगे, फि र इसी उपयुक्त फैब्रिक की मदद से सुरक्षा किट बनाई जाएगी, भारतीय रेलवे भी इसके लिए फैब्रिक बना रहा है। अब तक देश के 12 फैब्रिक निर्माता हैं जिन्होंने अपने प्रोटोटाइप के नमूने दक्षिण भारत वस्त्र अनुसंधान संघ (सिट्रा) में प्रमाणित करवाए हैं। इसके अलावाए देश में 25 उत्पादक हैं जो कि इस किट का उत्पादन कर रहे हैं।

- भारत ने स्पष्ट किया है कि जो भी पीपीई मटेरियल आ रहे हैं वह एफडीए अमरीका और सीइ यानी यूरोप की संस्थाओं से प्रमाणित हो, यदि वहां से नहीं है तो उन्हें भारतीय मापदण्डों पर खरा उतारा जाएगा।

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ब्रिटेन - ब्रिटेन के एनएचएस (यूके नेशनल हैल्थ सर्विस) ने गाउन को धोकर फि र से इस्तेमाल करने की अनुमति दी है यानी ये बेहतर है।- एयरोसोल, जनरेटिंग प्रक्रियाओं के लिए डिस्पोजेबल प्लास्टिक एप्रन के साथ धोए जाने योग्य सर्जिकल गाउन या कवरलेट है। - लंबी आस्तीन के लेबर कोट, लांग स्लीव, इंडस्ट्रियल कवरॉल गाउन या कवरॉल हटाए जाने के बाद हाथों पर बेहतर कवर।

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चीन- 5 अप्रैल तक भारत में चीन से करीब 1.70 लाख पीपीइ किट की सप्लाई आई थी, जिसमें से 50,000 किट क्वॉलिटी टेस्ट यानी सुरक्षा मानकों में खरे नहीं उतरे। 30,000 और 10,000 चीनी किट टेस्ट में पास नहीं हो पाए। इन उपकरणों की जांच डिफेंस रिसर्च ऐंड डवलपमेंट एस्टेबलिशमेंट (डीआरडीइ) की ग्वालियर स्थित लैबोरेटरी में हुई थी। 5 अप्रैल तक भारत में चीन से 1.70 लाख पीपीई किट आए थे, इनमें से 50 हजार क्वॉलिटी टेस्ट में फेल हो गए थे। - चीन के निर्माताओं द्वारा हीट सीलिंग मशीन की आपूर्ति में हो रही देरी के चलते देश पीपीई किट की कमी है। पीपीई किट उच्च दर्जे की प्लास्टिक से बनी होती है, इस किट से उपचार के समय डॉक्टर या चिकित्सकीय कर्मचारी खुद को सिर से लेकर पैर तक ढक सकते हैं। इस पीपीई किट की सिलाई के लिए हीट सीलिंग मशीन का उपयोग किया जाता है, इस मशीन का निर्माण चीन की कंपनी करती है। वर्तमान समय में भारत के पास 150 हीट सीलिंग मशीनें हैं, इन मशीनों से 12 से 13 हजार पीपीई किट प्रतिदिन बनाई जाती है, लेकिन भारत की जरूरत के हिसाब से यह आंकड़ा नाकाफ ी है। देश को 500 से 600 हीट सीलिंग मशीन की आवश्यकता है।

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ये है दोनों पीपीइ किट में अन्तर - ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टेडर्ड के अनुसार चीन के पीपीइ किट में वायरस बेरियर मटेरियल नहीं था, जबकि ब्रिटेन का किट सुरक्षित है।

- चीन के किट में शामिल फेस शिल्ड मास्क रेडिएशन के लिए सुरक्षात्मक था, लेकिन बायोलॉजिक्स यानी विषाणु के लिए सुरक्षात्मक नहीं था। - दोनों की फिटिंग में अन्तर है, ब्रिटेन का किट ज्यादा आरामदायक था, गुणवत्ता अच्छी है, जिसे पहनकर बेहतर तरीके से काम किया जा सकता है, जबकि चीन के किट काफी ढीले हैं, पहनने पर एेसा लगता है जैसे कपडे़ लटक रहे हों।

- ब्रिटेन में निर्मित किट में अपेक्षाकृत गर्मी कम लगती है, वातावरण अनुकू  लित है, जबकि चीन के किट पहनने पर अन्दर से पसीना छूट जाता है।

- ब्रिटेन के किट के कपडे़ की क्वालिटी में अन्तर है, बैठने पर ये फटते नहीं है, जबकि चीनी किट कई बार बैठने पर फट भी रहे हैं।



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