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प्रशासन चाहे तो बच सकती बेशकीमती जमीन

Precious land can be saved if the administration wants

अजमेर. लॉक डाउन lock down के दौरान अजमेर विकास प्राधिकरण ada व नगर निगम nagar nigam चाहे तो उसकी बेशकीमती जमीनें बच सकती है। शहर में कई प्राइम लोकेशन पर झुग्गियों के जरिए इन पर कब्जा कर बैठे प्रवासी मजदूर/ अतिक्रमी अब अपने घर लौट गए हैं। एेसे में इन जमीनों से झुग्गियां हटाकर फिर से कब्जा लिया जा सकता है। प्रवासी श्रमिकों के लॉक डाउन के कारण चले जाने से झुग्गी बस्तियां वीरान पड़ी हैं। जिले से करीब 17 हजार प्रवासी श्रमिक पलायन कर चुके हैं।

यहां है झुग्गी बस्तियां

शहर में बड़े पैमाने पर प्रगति नगर कोटड़ा, महाराणा प्रताप नगर, पृथ्वीराज नगर, पंचशील ई-ब्लॉक, डीडी पुरम, जयपुर रोड,ब्यावर रोड, जीसीए के बाहर सहित अन्य जगहों पर लोगों ने सरकारी भूमि तथा सडक़ों के किनारे कब्जा कर झुग्गी-झोपडिय़ां बना रखी हैं। इनमें हजारों की संख्या में लोग रह रहे थे। अब ये झुग्गियां खाली पड़ी हैं। यह झुग्गियां शहर के पॉश इलाकों में अलग ही नजर आती हैं।

ठेकेदार नहीं करते व्यवस्था

शहर में प्रगति नगर कॉलोनी कोटड़ा में सरकारी भूमि पर सैकड़ों झुग्गी बस्तियां है। इनमें अधिकतर मध्य प्रदेश/ बिहार व यूपी के मजदूर रहते हैं। कोटड़ा व आसपास के क्षेत्र में बड़े पैमाने पर फ्लैट्स सहित अन्य निर्माण चल रहे हैं। बिल्डर व ठेकेदार इन्हें मध्य प्रदेश से लेकर तो आ जाते हैं लेकिन इनके रहने आदि की व्यवस्था नहीं करते। एेसे में यह सरकारी जमीन पर झुग्गियां डालकर कब्जा जमा लेते हैं।

स्थानीय लोग करते हैं विरोध

इन कच्ची/ झुग्गी बस्तियों शौचालय आदि की व्यवस्था रहीं होने से आसपास की कॉलोनियां के लोग कई बार विरोध भी कर चुके हैं। इनमें रहने वाले लोग आसपास की जगहों व सडक़ों का उपयोग शौच के लिए करते है इससे गंदगी फैलती है। शहर को शौच से मुक्त करने के दावे की भी पोल खुलती है।

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