कोटा. जिला कलक्टे्रट के पीछे के क्षेत्र में खंडगांवड़ी में सरकारी जमीन पर अतिक्रमण करने के लिए हरे पेड़ जलाए जा रहे हैं। इतना ही नहीं यहां ब्लास्टिंग करके मिट्टी के टीले और पेड़ पौधे उड़ाए जा रहे हैं। जिससे यहां रहने वाले पशु पक्षियों की भी मौत हो रही है। हरियाली खत्म होने से पर्यावरण पर संकट मंडरा रहा है। नगर विकास न्यास का दफ्तर रोज खुलता है और स्थानीय लोग शिकायत भी कर चुके हैं, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। यहां सालों से इसी तरह अतिक्रमण हो रहा है। अधिकारी खानापूर्ति के लिए कभी कभार कार्रवाई करते हैं। जब बारिश आती तो यह क्षेत्र डूब में आ जाता है तब तबाही मचती है। निर्धन लोग सस्ते भूखंड के चक्कर में भू माफियाओं के चंगुल में फंस जाते हैं। वर्ष 2019 के मार्च में चुनाव आचार संहिता की आड़ में भी तेजी से अतिक्रमण हुआ तब न्यास ने खानापूर्ति के लिए सामान जप्त करके कार्रवाई रोकी, लेकिन फिर कुछ दिनों बाद अतिक्रमण फिर शुरू हो गया। सालों से यही सिलसिला चला आ रहा है। अब कोरोना के सन्नाटे में भू माफिया पेड़ चलाकर अतिक्रमण करने पर आमदा हैं। खंडगांवड़ी क्षेत्र के खसरा नंबर सात की भूमि पर जब छह साल पहले अवैध रूप से प्लानिंग काटकर भूखंड बेचे जा रहे थे, जब यह बात न्यास की जानकारी में थी, लेकिन अतिक्रमण रोकने की प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। इससे पहले 20 नवम्बर 2014 को पटवारी ने मौका निरीक्षण के बाद यह रिपोर्ट दी थी कि खसरा नम्बर सात न्यास के खाते में दर्ज है। इस जगह के टीलों को समतल करके काफी लोगों ने अतिक्रमण करके नींव खोद ली है। करीब 40-50 मकानों का अवैध रूप से निर्माण चल रहा है। इसलिए इन अवैध निर्माणों को तोड़ा जाना प्रस्तावित है। इसमें यह भी लिखा गया कि इसकी जानकारी उच्च अधिकारियों को देने के साथ भारी पुलिस बल की जरूरत रहेगी। पटवारी ने यह पत्रावली तहसीलदार के पास प्रस्तुत की। इसके बाद तहसीलदार ने भी इस पर यही टिप्पणी की। तहसीलदार ने लिखा कि भारी पुलिस बल चाहिए, इसके लिए पुलिस अधीक्षक को लिखा जाना चाहिए। इसके बाद यह पत्रावली उप सचिव के पास गई है। इस तरह पत्रावली चली और अधिकारी एक-दूसरे को पत्र लिखते रहे। इसके बाद अतिक्रमण हटाने गए तो तत्कालीन विधायक ने मौके पर जाकर कार्रवाई बंद करवा दी। इसके बाद न्यास के उप सचिव ने 16 फरवरी 2015 को इस बारे में एक पत्र जिला प्रशासन को लिखा, जिसमें यह अवगत कराया गया कि दिसम्बर 2014 में पुलिस के साथ अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की गई, लेकिन मौके पर ग्रामीण और तत्कालीन विधायक ने विरोध उत्पन्न किया। इस कारण कार्रवाई रोकनी पड़ी। इस समय हालत यह कि पुराना अतिक्रमण तो न्यास से हटा नहीं और नया और होता जा रहा है। जबकि न्यास की ओर से हाईकोर्ट में भी अतिक्रमण हटाने हलफनामा पेश किया जा चुका है।





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