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छोटे से गांव में जन्मे, खुद के बैंक व कम्पनियां खोल दी, 30 साल की उम्र में खड़ा किया बिज़नेस एम्पायर

जन्म 10 अप्रेल 1894
निधन 11 जून 1983

पिलानी। प्रतिभाएं खुद अपना मार्ग बना लेती है। ईमानदारी से पूरी मेहनत की जाए तो सफलता से कोई नहीं रोक सकता। अपनी खुद की मेहनत के दम पर घनश्यामदास बिरला(जीडी बिरला) उस मुकाम तक पहुंचे कि उनका नाम ही बेमिसाल हो गया। कस्बे की पहचान उनके परिवार के नाम से हो गई।

उनका जन्म राजस्थान में झुंझुनूं जिले के उस समय के छोटे से गांव पिलानी में बलदेव दास बिरला घर पर हुआ। पिलानी में प्रारंभिक शिक्षा के बाद घनश्याम दास किशोर अवस्था में ही अपने पुस्तैनी व्यापार में सहयोग करने के लिए कोलकाता चले गए। उन्होंने जूट व्यापार में काम करने के बाद वस्त्र निर्माण के क्षेत्र में कदम रखा। दिल्ली में बंद पड़ी एक कपड़ा मिल को खरीद कर बहुत मेहनत कर के बिरला मिल के रूप में उस का सफल संचालन किया।

सेंच्युरी तथा ग्रासिम उनकी औद्योगिक सफलता के बड़े उदाहरण हैं। इस के अलावा एल्मूनियम के क्षेत्र में हिंडालको की स्थापना की, हिन्दुस्तान मोटर्स, रसायन, सीमेंट, संचार सहित देश विदेश में अनेकों उद्योग स्थापित किए।

यूको बैंक की स्थापना की। स्वतंत्रता संग्राम में उन्होंने महात्मा गांधी व पंडित जवाहर लाल नेहरू के साथ घनिष्ठ सम्पर्क रखते हुए समय समय पर आन्दोलन को आर्थिक सहयोग प्रदान किया। उनका दिल्ली स्थित बिरला भवन तमाम राजनैतिक गतिविधियों का केन्द्र रहा। पिलानी में प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों की स्थापना व उनके व्यवस्थित संचालन के लिए वर्ष 1929 में बिरला एज्यूकेशन ट्रस्ट की स्थापना की।

पिलानी स्थित स्कूलों के संचालन के अलावा उस समय आजादी से पूर्व ट्रस्ट द्वारा पिलानी के आस पास चार सौ स्कूलों की स्थापना व संचालन एक उल्लेखनीय कार्य था।

जीडी बिरला ने पिलानी में बिरला इंजीनियरिंग कॉलेज, बिरला आर्टस कॉलेज आदि की स्थापना के बाद 1964 में इन सभी कॉलेजों के सम्मलित स्वरूप में अमरीका के मैसाच्यूट इंस्टीटयूट की तर्ज पर देश विदेश में विख्यात बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एण्ड साइंस ( बिट्स)की स्थापना की।

भारत सरकार के गौरवशाली अनुसंधान संस्थान केन्द्रीय इलेक्ट्रोनिकी अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान (सीरी) की स्थापना करवाई। जीडी बिरला के योगदान को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें पदमविभूषण की उपाधि से नवाजा गया था। वर्तमान में जीड़ी बिरला के वंशज विरासत को नेतृत्व प्रदान कर रहे हैं।



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