कोटा. कोटा जिले में कोरोना पॉजिटिव मरीज लगातार सामने आ रहे हैं। इस बीच राहत की बड़ी खबर यह कि कोविड अस्पताल में भर्ती रोगियों में से 509 रोगी नेगेटिव हो चुके हैं। इनमें से 501 रोगियों को अस्पताल से छुट्टी मिल गई है। मेडिकल कॉलेज के नियंत्रक डॉ. विजय सरदाना और उनकी टीम पूरी ताकत से कोविड से मुकाबला कर रही है। राजस्थान में सभी जिलों की तुलना में कोटा में कोरोना पॉजिटिव रोगियों की रिकवरी रेट सबसे ज्यादा है। कोटा में बुधवार को आई रिपोर्ट में 4 नए कोरोना संक्रमित मिले। कोटा जिले में 34 हजार 431 संदिग्धों की जांच की जा चुकी है। अब तक कुल ५३५ कोरोना पॉजिटिव सामने आए थे। जिनमें से ज्यादातर ठीक हो गए हैं। कोविड अस्पताल के अधीक्षक डॉ. सीएस सुशील ने बताया कि बुधवार को 6 लोगों को डिस्चार्ज किया गया। अब तक कोटा से 501 लोगों को डिस्चार्ज किया जा चुका है। कोरोना पॉजिटिव से दो बार नेगेटिव होने वालों का आंकड़ा भी 509 पर पहुंच गया। बुधवार को भी 11 लोग पॉजिटिव से नेगेटिव हुए है।
उधर, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री डॉ. रघु शर्मा ने कहा कि कोरोना पर नियंत्रण के लिए बरती जा रही थोड़ी सख्ती भी आमजन के हित में है। उन्होंने आमजन से इसमें भरपूर सहयोग करने की अपील की। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि गत 8 दिनों में पॉजिटिव केसेज में बढ़ोतरी की वजह भी की जा रही है। उन्होंने कहा कि विश्व स्वास्थ्य संगठन कह चुका है कि कोरोना की दवा या टीका अभी उपलब्ध नहीं हो सका है। ऐसे में केवल सावधानी ही बचाव है। उन्होंने कहा कि लोगों द्वारा बरती जा रही लापरवाही बड़े संकट का कारण बन सकती है।
डॉ. शर्मा ने बताया कि सरकार द्वारा आमजन को मास्क लगाने, भीड़ में ना जाने, बार-बार साबुन से हाथ धोने, दो गज की दूरी रखने की अपील की जा रही है, बावजूद इसके कुछ लोग लापरवाही बरत रहे हैं। उन्होंने कहा कि अनलॉक-1 के बाद ऐसी लापरवाही स्वयं और राज्य के लिए खतरा बन सकती है। कोरोना से जुड़ी सावधानी रखना आमजन के लिए जरूरी है। एक व्यक्ति कई लोगों को संक्रमित कर सकता है। उन्होंने 'सावधानी हटी-दुर्घटना घटीÓ की सोच को जीवनशैली में उतारने का आव्हान किया। चिकित्सा मंत्री ने कहा कि हालांकि प्रदेश में पॉजीटिव मरीजों की रिकवरी दर 75 प्रतिशत तक जा पहुंचा है। यदि पॉजिटिव केसेज 11368 हैं, तो पॉटिजिव से नेगेटिव होने वाले भी 8502 हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश में मृत्यु का प्रतिशत भी 2.5 प्रतिशत है। यही पॉजिटिव केसेज के दोगुनी होने के दिन भी 22 हैं, जबकि राष्ट्रीय औसत 16 दिन ही है। सभी पैमानों पर देखा जाए तो हालात काबू में है।





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